
उदयपुर. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित जेट प्री पीजी परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब परीक्षार्थियों ने प्रश्न पत्र को लेकर विवि पर सवाल उठाए हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि पर्चे में कुछ प्रश्न ऐसे थे, जिनके उत्तर सही लिखने के बावजूद इन्हें गलत करार देकर उन्हें प्रश्न पत्र से ही हटा दिया गया। विवि ने एनसीइआरटी और आरबीएसइ की पुस्तकों में दिए उत्तरों को मानने से इनकार कर दिया। साथ ही प्रश्न पत्र में भाषा को लेकर भी भेदभाव किया गया।
पूछा जिप्सम में कैल्शियम
परीक्षार्थियों ने बताया कि एक पर्चे के 15वें प्रश्न में अधिकतम अयुग्मित और इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बारे में पूछा गया। इसमें एफइप्लसटू सही उत्तर है। इसे पहले सही भी माना गया लेकिन बाद में प्रश्न ही हटा दिया। इसी तरह सीरीज बी कृषि विज्ञान के 18वें प्रश्न में जिप्सम में केल्शियम की मात्रा पूछी, जो कि 29.2 प्रतिशत है। 28वें प्रश्न में बीज से प्रवर्धन की एक मुख्य कमी पूछी, जिसका सही उत्तर यह था कि पौधे मातृपौधे के सदृश नहीं होते हैं। इसे भी सही मानकर बाद में प्रश्न को ही हटा दिया गया। इसी तरह 22वें प्रश्न में सूरजमुखी के बीज में तेल की मात्रा पूछी गई, जिसका सही उत्तर 45 से 50 प्रतिशत है। इस प्रश्न को ही हटा दिया गया। परीक्षार्थियों के अनुसार इन सभी प्रश्नों के उत्तर जो पहले सही माने थे वे एनसीइआरटी और आरबीएसइ की किताबों के अनुसार सही ही थे, लेकिन बाद में इन्हें गलत मानते हुए विवि ने हटा दिए। उल्लेखनीय है कि एमपीयूएटी जेट परीक्षा की पांच बार रिवाइज-की जारी कर चुका है।
एनसीइआरटी-आरबीएसइ को नहीं माना
परीक्षार्थियों का कहना है विवि इन प्रश्नों के अन्य उत्तर होने के साथ ही प्रश्न में त्रुटि होने की बात कर रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। प्रश्न अंग्रेजी में भी लिखे हुए है। दोनों भाषा के प्रश्न समान है। विवि एनसीइआरटी और आरबीएसइ की पुस्तकों के उत्तरों को मानने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही जीव विज्ञान बी सीरीज के दो प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस आए थे। परीक्षार्थियों के अनुसार विवि का तर्क है कि उनके प्रोफेसर टेक्स्ट बुक पढ़ते हंै। इसलिए उन पुस्तकों के उत्तर ही मान्य होंगे। ऐसे में जिन विद्यार्थियों ने 12वीं में एनसीइआरटी और आरबीएसइ से पढ़ाई की है, उनके साथ अन्याय है।