
उदयपुर के ये युवा साबित हो रहे राजनीति के चाणक्य, पॉलिटिकल मैनेजमेंट से दे रहे चुनावों को नए रूख
उदयपुर. अब तक युवा राजनीति से दूर भागतेे थे लेकिन शहर के 3 युवा राजनीतिक प्रबंधन को नयी परिभाषा दे रहे हैंं। जी हां, वे एक तरह से चाणक्य का काम कर रहे हैं। यानी की अपनी कैम्पेनिंंग से वे चुनावों को नए अंजाम तक पहुंचा रहे हैं। ये तिकड़ी है दिग्गज मोगरा, दिव्य वलवानी, अनिरुद्ध पुरोहित की जो उदयपुर के ही रहने वाले हैंं। इन्होंने शुरुआत की थी 2013 के अन्ना हज़ारे आंदोलन में वॉलेेंटियरिंंग के साथ और आज चुनाव कैैैम्पेनिंंग के क्षेत्र में अपना सिक्का मनवा चुके हैंं। इस तिकड़ी ने नरेंद्र मोदी 2014 कैम्पेन में प्रशांत किशोर के नेतृृृृत्व में विस्तार से काम करने के बाद अपनी ही कन्सल्टिंग फ़र्म शुरू की और इस क्षेत्र में बड़े से बड़े नामी से नामी नेताओं के साथ नज़दीक से काम किया और आज तक किसी भी चुनाव में हार नहीं देखी।
पॉलिटिकल मैनेजमेंट नया कॅरियर फील्ड
उदयपुर के गुलाबबाग निवासी दिग्गज मोगरा संत पॉल स्कूल से पढ़े हैंं तथा पेशे से इंजीनियर हैंं। इस तिकड़ी के सबसे पुराने सदस्य हैंं जो प्रशांत किशोर के साथ शुरुआत से थे एवं उनके काफ ी नजदीकी रह चुके हैंं। उनका कहना है कि राजनीति में कैम्पेनिंग स्ट्रेटेजी और पॉलिटिकल मैनेजमेंट एक नया ट्रेंड है। इस कारण ना केवल युवा इससे जुड़ रहे हैं बल्कि ये अब युवाओं के लिए नया कॅरियर फील्ड बन चुका है। फतेहपुरा निवासी दिव्य वलवानी ने द स्टडी से स्कूलिंग की उसके बाद लंदन की प्रतिष्ठित शेफील्ड यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की और अब राजनीतिक शोध एवं डेटा के जानकार हैंं। वहीं, सेक्टर 14 निवासी अनिरुद्ध पुरोहित ने आलोक स्कूल से अपनी पढ़ाई की उसके बाद दिल्ली विश्वविधलय से स्नातक किया और सोशल मीडिया क्षेत्र में काफी सक्रिय हैैं।
कर्नाटक, गुजरात चुनावों में रहे वॉर रूम स्ट्रेटेजिस्ट
उन्होंने बताया कि 2014 चुनाव के बाद प्रशांत किशोर के साथ ही काम करते हुए सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में बड़ी भूमिका निभाई जैसे 2015 में बिहार में नीतीश कुमार और 2016 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए। उसके बाद इन्होंने अपनी ख़ुद की संस्था शुरू करने का फैसला किया और 2017 में गुजरात चुनाव में मुख्यमंत्री विजय रूपानी की निजी कैम्पेन टीम की तरह काम किया। इसके बाद कर्नाटक चुनाव के लिए अभी हाल ही में चर्चित हुए डीके शिवकुमार से बुलावा आया जहां इन्होंने उनके साथ मिलकर 24*7 चलने वाला वार-रूम स्थापित किया, जिसमें 8 लोग ऑफि़स में एवं 29 लोग ज़मीन पे काम कर रहे थे और बूथ स्तर तक की ज़मीनी हकीकत को रियल टाइम में मुहैया कराने का काम करवाया।
Updated on:
11 Jun 2018, 8:22 PM IST
Published on:
11 Jun 2018, 7:49 PM IST
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