
उदयपुर में यहां दम तोड़ रही 108 एम्बुलेंस , मरीज हो रहे परेशान
हेमंत आमेटा/ भटेवर. राजस्थान सरकार द्वारा एक ओर बड़े-बड़े वादे स्वास्थ्य सेवाओंं हेतु किए जा रहे वहींं दूसरी ओर वल्लभनगर उपखण्ड मुख्यालय पर खड़ी 108 एम्बुलेंस की स्थिति बहुत ही दयनीय है। यहां एम्बुलेंस सेवा में महज खाना पूर्ति कर रखी है। उपखण्ड मुख्यालय पर खड़ी हुई एम्बुलेंस में पंखे व एसी चालू नहींं है तो गाड़ी में मेडिसिन भी पूरी नहींं मिलती है। इसके साथ मेन्टेनेंस के नाम पर कुछ नहींं करवाया जाता है। इसमें आगे-पीछे की लाइट गायब होने से आपातकालीन स्थिति होने पर भी रात को मजबूरन ऑफ़ लाइन करना पड़ता है।
एम्बुलेंस में जगह-जगह से जंग लगने से इसकी बॉडी खराब होने के कगार पर पहुंंच गई है। एम्बुलेंस पर कार्यरत स्टाफ को ओवरटाइम करवाने पर ओवरटाइम का भुगतान भी नहींं दिया जाता है जो श्रम कानून का उलंघन करना है। रात्रि के समय में गाड़ी को रिवर्स लगानी हो तो बेक लाइट नहींं हैै। एम्बुलेंस पर कार्यरत स्टाफ, संंविदा कर्मी जिनको इएलआई, पीएलआई जैसी कोई सुविधा नहींं देने के साथ ही स्टाफ में कोई रिलीवर नहींं होने से कई बार गाड़ी पड़ी रहती हैै जबकि यह योजना जनता की सेवा के लिए है। कभी कभार तो चालू नहींं होने पर एम्बुलेंस को धक्का मारकर स्टार्ट किया जाता है। लाखोंं कमियोंं के बावजूद भी विभाग द्वारा एजेंसी को करोड़ोंं रूपये का भुगतान कर दिया जाता है। जिले में कई स्थानों पर एम्बुलेंस की स्थिति दयनीय होने से आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस के समय पर नहींं पहुंंचने से मरीजोंं व घायलों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
उदयपुर के टीड़ी स्थित सेरा गांव में भी रविवार को एम्बुलेंस के समय पर नहींं पहुंंचने से प्रसूता को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देने के लिए विवश होना पड़ गया, इस घटना ने चिकित्सा व्यवस्थाओं की सरेआम पोल खोल दी। पूर्व में एम्बुलेंस की दयनीय स्थिति के लिए वल्लभनगर क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा तारावट में आयोजित कलेक्टर रात्रि चौपाल जनसुनवाई में जिला कलेक्टर को भी समस्या के बारे में लिखित में अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहींं हो पाया है।
Published on:
11 Jun 2018, 5:59 PM IST
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