उदयपुर

बड़ी कठिन डगर है पढाई की, पढ़ने के लिए इस तपती गर्मी में दो से दस किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर उदयपुर के मासूम

उदयपुर जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 21 हजार 270 है।
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Updated: 5 May 2018, 2:26 PM IST
school student walk two to ten km for study in udaipur

भुवनेश पण्ड्या / उदयपुर . सरकार के सब पढें-सब बढ़े नारे की कड़वी सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूल में पढऩे वाले राज्य के करीब पौने तीन लाख विद्यार्थी अपने घर से करीब दो से दस किलोमीटर की दूरी तय कर प्रतिदिन स्कूल पहुंचते हैं। इनमें से एक लाख 84 हजार तो पांचवीं कक्षा तक के मासूम हैं। स्थिति स्पष्ट है कि राज्य में आज भी ऐसे कई गांव व ढाणियां हैं, जहां सरकारी स्तर पर पढ़ाई का कोई साधन नहीं है। उदयपुर जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 21 हजार 270 है।


ऐसे बच्चों पर खर्च होंगे अब एक अरब :
राज्य के ऐसे बच्चों को अब ट्रांसपोर्ट वाउचर स्कीम के तहत राशि दी जाएगी। इस तरह प्रारंभिक शिक्षा पर 18 लाख 42 हजार रुपए और उच्च प्राथमिक में 13 लाख रुपए प्रतिदिन खर्च होंगे। प्रति माह 3 करोड़ 90 लाख 53 हजार 700 रुपए और सालाना आंकड़ा एक अरब से अधिक जाएगा।

चार जिलों में अधिक समस्या :
प्रदेश में चार ऐसे जिले हैं, जिनमें पहली से पांचवीं में पढऩे वाले सर्वाधिक बच्चे दो किलोमीटर से अधिक दूर स्थित दूसरे गांव की स्कूल में पढऩे जाते हैं। इनमें बाड़मेर के 19806, बांसवाड़ा के 10789, जोधपुर के 14929 और उदयपुर जिले के 14909 विद्यार्थी हैं।

अब ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना का लाभ..
पहली से पांचवीं तक के एक किलोमीटर से अधिक दूरी से पढऩे आने वाले बच्चों को दैनिक 10 रुपए और छठीं से आठवीं तक के बच्चों के लिए जो दो या इससे अधिक किलोमीटर दूरी से पढऩे जाते है, उन्हें दैनिक 15 रुपए दिए जाएंगे।
गिरिजा वैष्णव, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारभिक उदयपुर

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