
मधुलिका सिंह चौहान / उदयपुर . शहर के युवा वैज्ञानिक आशीष खत्री के आविष्कार ‘बनाना पीलिंग मशीन’ के पेटेंट को मंजूरी मिल गई है। उसके इस आविष्कार को केन्द्र सरकार के डीएसआईआर विभाग की टेप स्कीम के तहत करीब 1 लाख रुपए का अनुदान मिला था। गौरतलब है कि आशीष को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम से ‘बडिंग इनोवेटर्स अवार्ड-2010 का पुरस्कार भी मिल चुका है। वर्तमान में आशीष अरावली हॉस्पिटल में कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से ‘बनाना पीलिंग मशीन’ पर काम करना शुरू किया था। मशीन बनाने का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग को कम करना व ईको फ्रेंडली उत्पाद आमजन को उपलब्ध करवाना है। इससे ग्लोबल वार्मिंग में 8 से 10 प्रतिशत की कम की जा सकती है। आशीष ने अपनी सफलता के लिए परिजनों के साथ राजस्थान पत्रिका के निरंतर प्रोत्साहन को श्रेय दिया है।
यह है आविष्कार
आशीष ने केले के रेशे से ईको फ्रेंडली कागज बनाने वाली मशीन का निर्माण किया है। पहले मशीन प्रायोगिक तौर पर लकड़ी की बनाई थी, जिसे अब धातु में तब्दील कर दिया गया है। मशीन 10 फीट लम्बी और चार फीट चौड़ी है। इसमें केले के पत्ते डाले जाते हैं तो यह रेशों का निर्माण करती है, जो कागज, कपड़ा, प्राकृतिक डायपर्स, प्लाइवुड के अलावा पशु बंध्याकरण व पथरी की दवाई बनाने में उपयोगी है। एक रेशा करीब डेढ़ किलो ग्राम तक का भार वहन कर सकता है।
केन्द्र सरकार की ओर से चलाए जा रही टेक्नो उद्यमी संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत आशीष ने इस प्रोजेक्ट पर डॉ. एनएस राठौड़ व डॉ. एसएम माथुर के निर्देशन में काम किया है। उनके आविष्कार के कारण उनका नाम न्यूयॉर्क से प्रकाशित होने वाली विश्व की पहली ब्लॉगर मैग्जीन ‘ब्लॉगर्स पार्क’ में शुमार हो चुका है। उनके आविष्कार पर इसमें लेख दिया है।
Published on:
05 May 2018 01:45 pm
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