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PATRIKA STING: उदयपुर में पुलिस का मौन सिग्नल और अंधेरे में खनन का काला खेल, ऐसे फूटा भांडा, पढ़ें पूरी खबर

उदयपुर . सूनसान इलाकों में पेड़ों की ओट में छिपे बजरी लदी टै्रक्टर तो कहीं बजरी लादकर सरपट दौड़ते डंपर और ट्रक।
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 5 May 2018, 12:50 PM IST

illegal Gravel mining, bajari khanan in udaipur

डॉ. सुशीलसिंह चौहान, भुवनेश पंड्या, प्रमोद सोनी / उदयपुर . सूनसान इलाकों में पेड़ों की ओट में छिपे बजरी लदी टै्रक्टर तो कहीं बजरी लादकर सरपट दौड़ते डंपर और ट्रक। हर दो-तीन किलोमीटर पर गुमटी और कैबिनों पर खड़े लठैत। एस्कोर्ट करते निजी वाहन और बजरी खनन के खेल को पुलिस का मौन सिग्नल।


बजरी के अवैध खनन और कालाबाजारी पर सख्त हुए हाइकोर्ट के आदेश के दूसरे दिन शुक्रवार को शहर से महज 50 किलोमीटर के फासले पर चौंकाने वाले हालात देखने को मिले। नदी का सीना छलनी कर बजरी खनन माफिया चांदी कूट रहे हैं जिन्हें रोकने के जिए जिम्मेदार बहती गंगा में हाथ धोने से बाज नहीं आ रहे। बंधी का खेल इतना गहरा है कि अवैध कार्य हो रहा है, लेकिन कोई टोकने वाला नहीं। पत्रिका टीम ने लगातार दो दिन तक इस क्षेत्र की टोह ली तो बजरी खनन का पूरा काला चि_ा सामने आया।

इस काले खेल को रोकने की जिम्मेदारी जिन विभागों के कंधे पर हैं, उनके काले कारनामे भी उजागर हुए हैं। स्वयं वाहन चालकों ने बताया कि प्रति वाहन 100 से 200 रुपए की बंधी तय है।


यह है आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर पहले से रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट ने भी 3 मई के आदेश में नदियों किनारे खेतों से बजरी खनन पर रोक लगा दी है। साथ ही बजरी का उपयोग रोकने के लिए कलक्टरों को एसआइटी बनाकर छापेमारी कराने के निर्देश दिए हैं।


चौंकाने वाला सफर
कुराबड़, बंबोरा, गुडली और खरका पुलिया से रात के अंधेरे में बजरी के अवैध धंधे की सूचना पर पत्रिका टीम ने रात 7 बजे कुराबड़ रोड पर मोर्चा संभाला। अंधेरा बढऩे के साथ इस मार्ग पर बजरी माफियाओं की चमचमाते चौपहिया वाहनों के पीछे डंपर के काफिले एक-एक कर उदयपुर-कुराबड़ मार्ग के पहले टोल को पार करने में लगे। कीर की चौकी वाले मुख्य मार्ग पर सलूम्बर से करीब 20 किलोमीटर पहले तक पत्रिका की टीम ने सक्रिय बजरी माफियाओं की हर हरकत पर नजर रखी।

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ऐसे होती है मुखबिरी
खास यह रहा कि कुराबड़ से बंबोरा और सलूम्बर से 20 किलोमीटर पहले कुडली गांव तक रोड किनारे सोए हुए लोग बजरी के अवैध धंधे में लिप्त हैं। इनसे बातचीत में सामने आया कि रेत का जिक्र करते ही यह लोग एक बार आनाकानी करने के बाद स्थिति भांपकर बजरी उपलब्ध कराने के दावे करते हैं।

आशंका होने पर यही लोग संबंधित माफियाओं को अलर्ट भी कर देते हैं। ईडाणा माता मंदिर की ओर मुडऩे वाले मार्ग के किनारे और भीतर की ओर गुमटियों की आड़ में कुछ विशेष लोग आने-जाने वाले वाहनों की खबर रखते हैं। टोल पर बैठे कर्मचारी भी मोबाइल से इन माफियाओं को आने-जाने वाले जाप्ते की सूचना देकर कमाई में हिस्सेदारी बांटते हैं।

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पीछा भी किया
बंबोरा और सलूम्बर के बीच होकर उदयपुर लौटते समय बजरी लदी टै्रक्टर ट्रॉली का पीछा कर रही पत्रिका टीम का पायलेटिंग कर रही निजी जीप में सवार लोगों ने कुछ दूर तक पीछा भी किया, लेकिन टीम उनकी पहुंच से बाहर हो गई। इससे पहले सलूम्बर जाते समय लौदा गांव से आगे मुख्य मार्ग से कटते दो रास्ते पर बाएं हाथ वाले रोड से सूनसान इलाके में दाखिल हो गई। तब मार्ग किनारे डंपर के अलावा हाथ में ल_ और हथियार लिए हुए युवाओं की एक टोली हलचल में आ गई। पत्रिका टीम को आगे बढ़ता देख मुखबिरी कर रही इस टोली में हलचल भी देखी गई। हालांकि गलत रास्ते पर कुछ किलो मीटर जाकर पीछे लौटी टीम को बाद में कोई नहीं मिला।


धोबी घाट नहीं बजरी घाट
कहने को कुराबड़ कस्बे में नदी किनारे धोबी घाट बना हुआ है, लेकिन रात करीब 11.30 बजे पत्रिका टीम ने जब इस सूनसान क्षेत्र में जाने का जोखिम उठाया तो चौंकाने वाला सच सामने आया। मौके पर हर 200 मीटर के फासले पर पेड़ की आड़ में ट्रैक्टर ट्रोलियां बजरी से लदकर खड़ी थी। करीब ऐसी 30 ट्रैक्टर ट्रॉलियां देखने को मिले।


बिना नंबर कार को पुलिस का सिग्नल
गींगला तिराहे पर आश्चर्य चकित करने वाला नजारा दिखा। तिराहे पर उदयपुर पासिंग की बत्ती लगी बोलेरो नंबर 6105 में पुलिस का जाप्ता लदा बैठा था, जो समीप होकर गुजरते बजरी वाहनों को देख रहा था। तभी बिना नंबर की कार से पत्रिका टीम उस ओर बढ़ी तो पुलिस वाहन एक विशेष सिग्नल के साथ तिराहे पर घूमकर खड़ा हो गया। आशंका है कि बिना नंबर के किसी वाहन के आने पर पुलिस जवानों ने कोई संकेत देना चाहा था, जिसे पत्रिका टीम समझ नहीं पाई। करीब आधे घंटे के बाद लौटने पर पुलिस वाहन मौके से नदारद था।