
Mahipal Singh Chundawat Success Story: सफलता कभी बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कभी-कभी 200 रुपए उधार लेकर बनाए गए देसी डंबल्स भी करोड़ों लोगों तक पहुंचने का जरिया बन जाते हैं। राजस्थान में उदयपुर से 30 किमी दूर वाजमिया गांव के महिपाल सिंह चुंडावत की कहानी इसी जिद, संघर्ष और सकारात्मक सोच की मिसाल है। खेत-खलिहानों के बीच पले-बढ़े महिपाल ने सीमित साधनों से शुरुआत की और आज यूट्यूब पर 20 लाख और इंस्टाग्राम पर करीब डेढ़ लाख लोगों का भरोसा जीत चुके हैं।
साल 2020 में जब कोरोना काल में कई युवा रोजगार तलाश रहे थे, तब महिपाल सिंह अपनी छोटी-सी नौकरी के साथ एक बड़े सपने को आकार देने में जुटा था। महीने में महज चार हजार रुपए की आय थी। इतने पैसे भी नहीं थे कि जिम की मेंबरशिप ले सके। ऐसे में उसने दोस्तों से 150-200 रुपए उधार लेकर देसी जुगाड़ से डंबल्स और जिम का सामान तैयार किया।
दिनभर नौकरी और रात में घंटों अभ्यास उसकी दिनचर्या बन गई। सुबह काम पर निकलने से पहले व्यायाम और शाम को लौटकर फिर फिटनेस की तैयारी होती। इसी दौरान गांव के चौराहे पर मुलाकात विक्रम सिंह से होती रही। विक्रम ने महिपाल के जुनून को पहचाना और उसे अपनी टीम से जुड़ने का सुझाव दिया। इतना ही नहीं, जब महिपाल के पास बेहतर मोबाइल फोन भी नहीं था, तब विक्रम ने अपना बेकार पड़ा मोबाइल दे दिया। यही छोटा-सा सहयोग आगे चलकर उसके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
महिपाल ने फिटनेस को केवल व्यायाम तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसमें कॉमेडी का ऐसा तड़का लगाया कि लोग हंसते-हंसते सेहत संबंधी जरूरी बातें सीखने लगे। शुरुआत में वीडियो पर खास प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन उसने हार नहीं मानी। लगातार कंटेंट बनाता रहा। फिर एक वीडियो वायरल हुआ और इसके बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी।
महिपाल बताता है कि एक समय था जब गांव के ही लोग उसके काम का मजाक उड़ाते थे। उसे लाइन से भटक जाना कहते थे। कहते थे कि जवानी में टाइम पास कर रहा है, थोड़ा खेत में ही काम कर ले। लेकिन, जब मेहनत रंग लाई तो वही लोग अपने बच्चों को उसके साथ जोड़ने और डिजिटल कंटेंट बनाना सीखने की बात करने लगे। यह बदलाव उसके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पिछले पांच वर्षों से महिपाल कंटेंट क्रिएटर ही है। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ और अब सारा समय वीडियो बनाने, लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक करने, मनोरंजन से सकारात्मक संदेश देने में बीतता है। उसका मानना है कि यदि युवा निरंतर सीखते रहें और मेहनत से पीछे न हटे, तो गांव की गलियों से भी दुनिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचा जा सकता है।
सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का मंच नहीं, सीखने और समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम भी है। भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। रोज थोड़ा समय व्यायाम के लिए निकालें। हंसते-मुस्कुराते रहिए क्योंकि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच ही सफलता की सबसे मजबूत नींव है। यही उनका सक्सेस मंत्र है।