उदयपुर . महाराणा भूपाल चिकित्सालय की बाल चिकित्सा इकाई के सामान्य वार्ड में स्वाइन फ्लू वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ गया.
उदयपुर . महाराणा भूपाल चिकित्सालय की बाल चिकित्सा इकाई के सामान्य वार्ड में शनिवार शाम को मिशिगन स्ट्रेन स्वाइन फ्लू वायरस के संक्रमण का खतरा उस समय बढ़ गया, जब पीडि़त पिता कॉटेज वार्ड अलॉटमेंट करवाने को लेकर करीब एक घंटे तक स्वाइन फ्लू पॉजिटिव बेटी को गोद में लेकर खड़ा रहा। वार्ड में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे भर्ती थे।
पूछताछ करने पर रोगी बच्ची के पिता की आंखों में आंसू भर आए। वह यह कहते हुए बिलख पड़ा कि उसकी पत्नी का स्वाइन फ्लू वार्ड में उपचार जारी है। अब उसकी बेटी इस रोग की चपेट में है। दुर्भाग्य यह है कि उसकी बेटी को पहले बच्चा वार्ड, फिर स्वाइन फ्लू वार्ड, फिर बच्चा वार्ड में भर्ती करने के लिए इधर-उधर घुमाया जा रहा है।
सेक्टर नौ निवासी परिवार चिकित्सालय की अव्यवस्था को लेकर बेहद खिन्न नजर आया। गौरतलब है कि शनिवार को पांच साल की बच्ची स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाई गई। पत्रिका टीम की पूछताछ के बाद बाल इकाई के वार्ड 103 में सेवारत रेजीडेंट ने रोगी बच्ची के लिए कॉटेज वार्ड की व्यवस्था करवाई।
यह है व्यवस्था
बाल चिकित्सा इकाई में आने वाले बच्चों को आशंका होने पर रेजीडेंट स्वाइन फ्लू वार्ड में जांच के लिए रैफर करते हैं। स्वाइन फ्लू वार्ड में रोगी बच्चे का नमूना जांच लैब में भिजवाया जाता है। जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव मिलने के बाद बच्चे को उपचार के लिए फिर से पीडियाट्रिक्स के पास भेजा जाता है। अब तक सामने आए रोगियों में यह पहला बाल रोगी है। इस प्रक्रिया से स्वाइन फ्लू वायरस से वार्ड के दूसरे बच्चों में संक्रमण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहला मामला
मेरी जानकारी में यह पहला स्वाइन फ्लू पीडि़त बच्चा है। कॉटेज वार्ड में उसे आइसोलेशन देकर उपचार किया जाएगा। बच्चों का मर्ज पीडियाट्रिक्स ही ज्यादा समझते हैं। इसलिए मरीज को यहां शिफ्ट किया गया है।
डॉ. आर.एल. सुमन,विशेषज्ञ, बाल चिकित्सा इकाई