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उदयपुर के 10 डॉक्टरों की बर्खास्तगी तय! 20 साल तक ड्यूटी पर ही नहीं आए, डेढ़ महीने पहले मिले नोटिस का भी नहीं दिया जवाब

Udaipur Health Department: उदयपुर में 10 सरकारी चिकित्सक वर्षों से बिना अनुमति ड्यूटी से गायब मिले। डेढ़ महीने पहले नोटिस जारी होने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब स्वास्थ्य विभाग उनकी बर्खास्तगी और बॉन्ड राशि वसूली की कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।

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Udaipur Doctors Absent

उदयपुर सालों से लापता 10 सरकारी डॉक्टरों की बर्खास्तगी तय (फोटो-एआई)

Udaipur Doctors Absent: उदयपुर: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर अक्सर संसाधनों और रिक्त पदों की बात होती है। लेकिन उदयपुर शहर में सामने आया मामला इससे कहीं अधिक गंभीर है। यहां 10 ऐसे डॉक्टर चिन्हित किए गए हैं, जो कई साल से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित हैं।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करीब डेढ़ महीने पहले इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रिया शुरू कर नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अब विभाग बर्खास्तगी की तैयारी में जुटा है।

जनहित से जुड़ा गंभीर विषय

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसे केवल अनुपस्थिति का मामला नहीं, बल्कि सरकारी सेवा अनुशासन और जनहित से जुड़ा गंभीर विषय माना है। विभाग का मानना है कि जिन चिकित्सकों की जिम्मेदारी मरीजों का उपचार करना था, उनकी वर्षों की गैरहाजिरी का खमियाजा सीधे जनता को उठाना पड़ा।

चिकित्सकों के पद रिकॉर्ड में भरे

जांच में सामने आया कि कई अस्पतालों में चिकित्सकों के पद रिकॉर्ड में भरे हुए थे। लेकिन संबंधित डॉक्टर वर्षों से कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे। पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय में तैनात एक शिशु रोग विशेषज्ञ की वर्ष 2004 से अनुपस्थित बताई गई है।

वहीं, एमबी चिकित्सालय में पदस्थ दो चिकित्सक वर्ष 2012 और 2013 से ड्यूटी पर नहीं लौटे। इसके अलावा खेरवाड़ा, बेकरिया, बावलवाड़ा और अन्य ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है इन पदों पर डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए भटकना पड़ा।

डेढ़ महीने पहले शुरू हुई थी कार्रवाई

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने करीब डेढ़ महीने पहले लंबे समय से अनुपस्थित चिकित्सकों की सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कई चिकित्सकों को नोटिस भी जारी किए गए।

हालांकि, अधिकांश मामलों में न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही चिकित्सक सेवा में लौटे। अब विभाग ने ऐसे मामलों को अंतिम चरण में पहुंचाते हुए सेवा समाप्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

सरकारी खर्च पर पीजी, फिर सेवा से से दूरी

सूची में शामिल कुछ चिकित्सकों ने सरकारी सेवा में रहते हुए सेवारत कोटे के तहत पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की पढ़ाई की। सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए उन्हें अवसर और सुविधाएं दीं, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्धारित अवधि तक सेवा देने के बजाय वे लंबे समय से अनुपस्थित रहे। अब विभाग ऐसे चिकित्सकों से बॉन्ड राशि भी वसूलने की तैयारी कर रहा है।

इनका कहना है…

लंबे समय से अनुपस्थित चिकित्सकों के के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। निदेशालय के निर्देशानुसार सभी प्रकरणों की समीक्षा कर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। जिन चिकित्सकों ने नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ सेवा समाप्ति सहित आवश्यक कार्रवाई के प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
-डॉ. अशोक आदित्य, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी