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जानलेवा है ​डेंगू-स्वाइन फ्लू, सतर्कता से करें मुकाबला

शहरवासी डेंगू-स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारियों से डरें नहीं, सतर्कता हो कर मुकाबला करें। कई लोगाें ने इन बीमारियों को पछाड़ा है।

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कोटा

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ritu shrivastav

Sep 23, 2017

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स्वाइन फ्लू

शहर में डेंगू,स्वाइन फ्लू व स्क्रब टायफस जैसी जानलेवा बीमारियों का कहर चल रहा है। इन बीमारियों से कई परिवारों के चिराग बुझ गए तो कइयों का सुहाग उजड़ गया। कुछ परिवारों से मां का आंचल छिन गया। इन सबके बावजूद कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन जानलेवा बीमारियों को पछाड़कर काल के जबड़े से बाहर आए हैं। इन जानलेवा बीमारियों से शहरवासी दहशत में हैं, लेकिन इनसे डरें नहीं, बल्कि सतर्क रहकर मुकाबला करें। राजस्थान पत्रिका ने इन बीमारियों को पछाड़कर स्वस्थ हुए लोगों से बात की।

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टूट चुका था शरीर

रंगबाड़ी विस्तार योजना स्थित बालाजी नगर निवासी महेन्द्र गुप्ता ने बताया कि 9 सितम्बर को घर पर दोपहर में खाना खाया। उसके बाद अचानक उल्टी हुई, जी घबराने लगा। थोड़ी देर बाद बुखार जैसी स्थिति हो गई। एक-दो दिन घर पर उपचार चला। उसके बाद निजी अस्पताल में उपचार चला। वहां 18 सितम्बर तक भर्ती रहा। जांच कराई तो डेंगू पॉजीटिव आया। 16 सितम्बर को 44 हजार प्लेटलेट्स रह गई। उसके बाद एसडीपी चढ़ाई गई, लेकिन एक दिन तो कवर हुई, लेकिन फिर से प्लेटलेट्स डाउन हो गई। दोबारा प्लेटलेट्स चढ़ाई गई। प्लेटलेट्स बढ़ी। डेंगू के कारण पूरा शरीर टूट चुका था। उसके बाद छुट्टी होने पर घर पहुंचा।

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मौत के मुंह से निकलकर बाहर आया

उत्तरप्रदेश के जालौन के कोच गांव निवासी अमन पटेल इसी साल कोटा में आईआईटी की कोचिंग करने आया, लेकिन डेंगू ने एेसा जकड़ा कि सात दिन तक बीमार रहा। अमन ने बताया कि 15 सितम्बर को बुखार आया। निजी अस्पताल में जांच कराई तो प्लेटलेट्स 70 हजार बताई। उन दिनों अस्पतालों में इतनी भीड़ थी कि बेड खाली नहीं होने से चिकित्सकों ने भर्ती तक नहीं किया, फिर जैसे-तैसे तलवंडी स्थित एक अस्पताल ने उसे भर्ती किया गया। अस्पताल में हुई जांच में डेंगू पॉजीटिव निकला। प्लेटलेट्स घटकर 2 हजार रह गई। खून की कमी हो गई। उस समय मकान मालिक के बेटे ने एक यूनिट रक्त दिया। बाद में फेफड़े व लीवर में पानी भर गया। नाक से खून निकलने लगा। गांव से पापा यहां आ गए। जीवनदाता ग्रुप के भुवनेश गुप्ता डोनर प्रतीक अग्रवाल को लेकर पहुंचे और एसडीपी दी। उसके बाद स्वस्थ हूं।

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हार्ट अटैक के बीच स्वाइन फ्लू

बारां जिले के अंता निवासी लक्ष्मीनारायण पांचाल ने बताया कि 11 सितम्बर को अचानक सीने में दर्द हुआ। भाई राजू कोटा लेकर पहुंचे। यहां तलवंडी स्थित निजी अस्पताल में जांच कराई। हार्ट अटैक के साथ जांच में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आया। उसके बाद सात दिन तक उपचार चला। अब पूरी तरह से ठीक हूं!

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स्वाइन फ्लू की दस्तक के साथ ही टीके लगवाएं

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम व्यास ने जानकारी दी कि टीके से बीमारी आने से पहले सुरक्षा हो जाती है। बावजूद इसके यदि महिला पॉजीटिव आए तो चिकित्सक की सलाह अनुसार दवाई लें। पांच दिन तक अन्य लोगों से दूर रहना चाहिए, ताकि सम्पर्क में आने वालों तक रोग नहीं पहुंचे। सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत टेस्ट करवा लें। मुंह पर मास्क लगाएं।

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डेंगू : बारिश से मिल रहा मच्छरों को जीवनदान, साफ सफाई रखे

फिजिशियन डॉ. बी.सी. तैलंग ने कहा कि इन दिनों बीच-बीच में हो रही बारिश के कारण मच्छरों की प्रजनन क्रिया हो रही है। इससे मच्छरों को जीवनदान मिल रहा है। इसी कारण डेंगू का प्रकोप फैल रहा है। घरों व आस-पास साफ सफाई रखें। खाली प्लॉटों व पार्कों में भरे पानी में जला तेल डालें। घरों पर रखे मटकों, कबाड़ व कूलरों को साफ रखें। शरीर को ढककर रखें। दिन में मच्छरों को भगाने का उपाय करें।