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उदयपुर : यूजर चार्ज का ‘साइडइफेक्ट’:सूनी होने लगीं मंडियां; 67 व्यापारियों ने बाहर बनाया ठिकाना

उदयपुर कृषि उपज मंडी में लगाए गए 0.50 प्रतिशत यूजर चार्ज के विरोध में 67 व्यापारी मंडी से बाहर कारोबार शिफ्ट कर चुके हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।

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krishi mandi udaipur

file photo

उदयपुर. राज्य सरकार की ओर से अगस्त 2025 में कृषि उपज मंडियों के अंदर बिकने वाली दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लगाए 0.50 प्रतिशत यूजर चार्ज का विरोध दस महीने बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब मंडी प्रशासन की ओर से व्यापारियों को नोटिस जारी कर बकाया यूजर चार्ज जमा कराने के निर्देश दिए जाने के बाद विवाद फिर गहरा गया है। व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरकार यह शुल्क वापस नहीं लेती, तब तक वे इसका भुगतान नहीं करेंगे। व्यापारियों का आरोप है कि जिस शुल्क का वर्तमान सरकार ने विपक्ष में रहते हुए विरोध किया था, सत्ता में आने के बाद उसे समाप्त करने के बजाय और बढ़ा दिया। उनका कहना है कि इसका सीधा असर व्यापार, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

व्यापारियों के अनुसार वर्षों से उपभोक्ता मंडियों में इसलिए खरीदारी करने आते थे क्योंकि वहां ताजा और गुणवत्तापूर्ण सामान अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होता था। लेकिन यूजर चार्ज लागू होने के बाद स्थिति बदल गई है। अब मंडी के भीतर बिकने वाला आटा, दाल, चावल, खाद्य तेल, मैदा, सूजी, नमक और अन्य खाद्य सामग्री अतिरिक्त शुल्क के कारण महंगी पड़ रही है, जबकि वही सामान मंडी के बाहर अपेक्षाकृत सस्ता उपलब्ध है। व्यापारियों का कहना है कि आखिरकार इस शुल्क का भार उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ता है, जिससे आम परिवारों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।

मंडी से बाहर शिफ्ट हो रहा कारोबार

यूजर चार्ज लागू होने के बाद सबसे बड़ा असर मंडी व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। उदयपुर कृषि उपज मंडी में करीब 400 व्यापारी सक्रिय हैं, जिनमें से 67 व्यापारियों ने मंडी के बाहर अपने गोदाम और व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित कर लिए हैं। वहां माल की खरीद-फरोख्त हो रही है, जबकि मंडी स्थित दुकानों का उपयोग केवल भुगतान और कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है।

पहले से कई शुल्क, फिर नया बोझ क्यों?

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि मंडी में कारोबारी पहले से ही विभिन्न शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं। तिलहन पर 1 प्रतिशत मंडी शुल्क और 0.5 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क मिलाकर कुल 1.5 प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। वहीं गेहूं आधारित उत्पादों पर 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क और 0.5 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क सहित कुल 2.10 प्रतिशत शुल्क देय है। ऐसे में तैयार उत्पादों पर पुनः 0.50 प्रतिशत यूजर चार्ज लगाना एक ही वस्तु पर दोहरी वसूली जैसा है।

छोटे कारोबारियों की कमजोरी होगी स्थिति

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि स्थानीय व्यापारी पहले से ही बड़े मॉल, संगठित रिटेल चेन और ऑनलाइन कंपनियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त यूजर चार्ज छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा। उनका कहना है कि आज तक किसी ग्राहक से यूजर चार्ज वसूल नहीं किया गया और न ही मंडी प्रशासन को जमा कराया गया है। इसके बावजूद अब बकाया राशि जमा कराने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों में असंतोष और बढ़ गया है।

व्यापारियों ने यों जताई पीड़ा

यूजर चार्ज छोटे व्यापारियों पर नया आर्थिक बोझ है। इससे कारोबार की लागत बढ़ रही है और व्यापार प्रभावित हो रहा है। नए उद्यमी भी व्यापार के क्षेत्र में आने से हिचकेंगे।

अर्जुन जैन, उपाध्यक्ष, श्री उदयपुर ऑयल एंड सीड्स एसोसिएशन

व्यापारियों पर पहले से मंडी शुल्क और कृषि कल्याण शुल्क का भार है। ऐसे में अतिरिक्त यूजर चार्ज लगाना व्यापार और उपभोक्ता दोनों के हित में नहीं है।

राजकुमार चित्तौड़ा, सचिव, श्री उदयपुर दाल-चावल व्यापार संघ

जब देश में एक राष्ट्र, एक टैक्स की बात हो रही है, तब ऐसे अतिरिक्त शुल्क उचित नहीं हैं। यूजर चार्ज लागू होने के बाद मंडी में व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है।

चिराग बंसल, कोषाध्यक्ष, श्री उदयपुर ऑयल एंड सीड्स एसोसिएशन