22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

साल में एक दिन खुलता है महाराणा प्रताप का जन्म कक्ष, पहुंचने के लिए दुर्ग के 9 दरवाजों से होकर गुजरना पड़ता था

Maharana Pratap Jayanti: महाराणा प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ दुर्ग स्थित बादल महल के एक विशेष कक्ष में हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, रविवार, विक्रम संवत 1597 को हुआ था।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

उदयपुर

•

image

Santosh Trivedi

•

Updated: 17 Jun 2026, 12:36 PM IST

maharana pratap birth place

कुंभलगढ़ दुर्ग स्थिति वह कक्ष जिसमें महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। Photo- Patrika

Maharana Pratap Jayanti : उदयपुर । वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर उनके जन्मस्थल से जुड़ी एक विशेष जानकारी सामने आई है । विश्वविख्यात योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ दुर्ग स्थित बादल महल के एक विशेष कक्ष में हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, रविवार, विक्रम संवत 1597 को हुआ था। यह कक्ष वर्षभर बंद रहता है और केवल महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर ही श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोला जाता है ।

कुंभलगढ़ दुर्ग की ऊंचाई पर स्थित बादल महल में बना यह लगभग 10 गुणा 10 फीट का कक्ष सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था । इस तक पहुंचने के लिए दुर्ग के नौ दरवाजों से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे दुश्मनों की पहुंच लगभग असंभव थी । कक्ष में हवा और रोशनी के सीमित प्रवेश की व्यवस्था थी । दीवारों में दीपक रखने के लिए छोटी-छोटी ताकें बनाई गई थीं, जबकि ऊपर गुंबदनुमा छत का निर्माण इस प्रकार किया गया था कि गर्मी , बरसात और बाहरी प्रभावों का असर भीतर कम से कम पहुंचे ।

सामान्य दिनों में रहता है बंद

इतिहासकार कुबेर सिंह सोलंकी के अनुसार यह कक्ष मेवाड़ की अमूल्य धरोहर है । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में होने के कारण इसे सामान्य दिनों में नहीं खोला जाता, ताकि इसकी मौलिकता और संरचना सुरक्षित बनी रहे । प्रतिवर्ष केवल महाराणा प्रताप जयंती पर यहां पुष्पांजलि अर्पित की जाती है ।

इतिहासकारों की समिति ने किया निर्णय

साहित्यकार बताते हैं कि वर्ष 1993 में कुंभलगढ़ दुर्ग को आमजन के लिए व्यवस्थित रूप से विकसित किए जाने के बाद इतिहासकारों की समिति ने विस्तृत अध्ययन और शोध के आधार पर इस कक्ष को महाराणा प्रताप का जन्मस्थल चिह्नित किया। इसके बाद इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा ।

आदिवासी गांवों में बीता था बचपन

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का बचपन कुंभलगढ़ और अरावली क्षेत्र के आदिवासी गांवों में बीता । भील समाज से महाराणा प्रताप घनिष्ठ संबंध थे । भील परिवारों में उन्हें स्नेहपूर्वक ‘ कीका ’ कहा जाता था । यही कारण है कि आगे चलकर ‘कीका राणा’ नाम भी महाराणा प्रताप की पहचान बन गया । मुगल दस्तावेज में भी कई स्थानों पर उनका उल्लेख ‘ कीका राणा ’ के रूप में मिलता है ।