
आयड़ नदी सीमा में जिला कलक्टर व निगम आयुक्त को अतिक्रमण दिखाते विधायक
उदयपुर. आयड़ नदी में लगातार बढ़ते अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन और जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने यूडीए, नगर निगम और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ आयड़ नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान नदी सीमा में पाए जाने वाले निर्माणों का सर्वे कर उन पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाने तथा नए निर्माण कार्यों को तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए। आयड़ पुल से शुरू हुआ यह निरीक्षण अशोक नगर श्मशान घाट तक चला, जहां अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नदी पेटे में पैदल चलकर अतिक्रमणों और निर्माण गतिविधियों का जायजा लिया।---
15 से 20 फीट तक नदी क्षेत्र में हुए कब्जे
निरीक्षण के दौरान विधायक ताराचंद जैन ने जिला कलक्टर को बताया कि राजस्व, यूडीए और नगर निगम की ओर से किए गए सीमांकन के अनुसार कई स्थानों पर आयड़ नदी की मूल सीमा में 15 से 20 फीट तक अतिक्रमण किया गया है। जैन ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रयास कर आयड़ नदी का सीमांकन कराया गया है, इससे वास्तविक स्थिति सामने आई है।
सर्वे करें, लाल निशान लगाएं, निर्माण रोकें
कलक्टर ने यूडीए और नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी सीमा में आने वाले सभी निर्माणों का विस्तृत सर्वे कराया जाए और अतिक्रमण की जद में आने वाले निर्माणों पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयड़ नदी के किनारे यदि कहीं भी नया निर्माण कार्य चल रहा है तो उसकी तत्काल जांच की जाए। यदि निर्माण नदी पेटे या निर्धारित सीमा में पाया जाता है तो उसे तुरंत रुकवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
आयड़ नदी की सीमा पर होगी फेंसिंग
निरीक्षण के दौरान विधायक ताराचंद जैन ने नदी की निर्धारित सीमा पर फेंसिंग कराने का सुझाव दिया, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। इस पर जिला कलक्टर ने सहमति जताते हुए नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना को फेंसिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। कलक्टर ने आगामी मानसून में पुनः सघन वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए।
स्मार्ट सिटी की दीवार पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान नदी पेटे में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत निर्मित दीवार को लेकर भी चर्चा हुई। विधायक जैन ने बताया कि यह दीवार नदी की वास्तविक सीमा से करीब 15 से 20 फीट आगे बनाई गई है। उन्होंने अधिकारियों को नदी की वास्तविक सीमा के अनुसार सुरक्षा फेंसिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
1972 की बाढ़ का भी किया उल्लेख
निरीक्षण के दौरान विधायक ताराचंद जैन ने वर्ष 1972 की ऐतिहासिक बाढ़ का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय आयड़ नदी में इतना पानी आया था कि अशोक नगर श्मशान घाट की चद्दरें तक जलमग्न हो गई थी। उन्होंने कहा कि आयड़ नदी मूल रूप से काफी चौड़ी थी, लेकिन वर्षों में हुए अतिक्रमणों ने इसके स्वरूप को संकुचित कर दिया है।
Updated on:
16 Jun 2026 05:49 pm
Published on:
16 Jun 2026 05:48 pm
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