
यशवंत पटेल/भाणदा. कहते हैं प्रतिभा किसी के एहसान की मोहताज नहीं होती है। बल्कि लगन और परिश्रम से उच्च शिखर तक पहुंचने का प्रयास करते है। ऐसा ही जज्बा देखने को मिलता है उदयपुर जिले के खेरवाड़ा उपखण्ड के ग्राम पंचायत बायडी के पाल फले में अनामिका में।
10 वर्ष की अनामिका राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बायडी पाल में कक्षा पांचवींं में अध्ययनरत है और पांचवींं बोर्ड की परीक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बायडी में बोर्ड परीक्षा दे रही है।
अनामिका के दोनों हाथों के पंजे नहींं हैंं और 1 पैर से भी अपंग है। फिर भी अपनी लगन से पढ़ाई कर रही है। प्रधानाचार्य प्रताप लाल गरासिया का कहना है कि बालिका होनहार व आज्ञाकारी है। बालिका अनामिका का कहना है कि पापा अशोक बरन्डा गुजरात के अहमदाबाद में मजदूरी करते हैंं और माताजी गृहणी हैंं । वे चार भाई/बहन हैंं। पापा मजदूूरी कर हमें पढ़ा रहे हैंं। मैंं पढ़ लिख कर जनजाति क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाना चाहती हूूं और जनजाति क्षेत्र के लिए 1 मिसाल बनना चाहती हूं।
शिक्षक डायालाल कलाल का कहना है कि बालिका अपंग होने के बाद भी घर पर खाना,पशुओंं की रखवाली व अपना काम भी स्वंय कर लेती है।राज्य सरकार से अनामिका को ट्राय साइकिल दी गयी है मगर हाथ नहींं होने से चला नहींं सकती है।जिससे रोजाना स्कूल भी चल कर आती है।