उदयपुर

उदयपुर में UDA का हाल बेहाल: 65.3 फीसदी पद खाली, सिर्फ 75 अधिकारी संभाल रहे पूरा सिस्टम

उदयपुर में शहरी विकास से जुड़ी प्रमुख एजेंसियों में स्टॉफ की भारी कमी सामने आई है। UDA में 65.3 फीसदी पद खाली हैं और सिर्फ 75 अधिकारी-कार्मिक कामकाज संभाल रहे हैं। वहीं, JDA में 268 स्वीकृत पदों में से 175 रिक्त हैं।
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Feb 01, 2026
Udaipur Urban Development
Udaipur Urban Development (Patrika Photo)

उदयपुर: यूआईटी से उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) बने करीब एक साल हो गया, पर अब भी इसमें 65.3 फीसदी पद खाली हैं। जेडीए के स्वीकृत ढांचे के अनुसार, कुल 268 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से मात्र 93 पदों पर ही नियुक्तियां हुई, जबकि 175 पद खाली हैं। यूडीए का समूचा जिम्मा महज 75 अधिकारी-कार्मिक संभाल रहे हैं।

यूडीए बनने के बाद एक ओर जहां शहर का क्षेत्रफल, जिम्मेदारियां और योजनाओं का दायरा कई गुना बढ़ गया। वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी।

नतीजतन, आमजन से जुड़े नक्शा स्वीकृति, ले-आउट अनुमोदन, अतिक्रमण हटाने, विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और शिकायत निस्तारण जैसे काम का दबाव चुनिंदा अधिकारियों और कार्मिकों पर बढ़ा है। हालांकि, यूडीए अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न पदों पर आवश्यकतानुसार प्लेसमेंट एजेंसियों से भी सेवाएं लेते हैं।

मैनपावर की यह तस्वीर

-उपयुक्त (आरएएस) के 4 में से 2 पद रिक्त हैं।
-निदेशक अभियांत्रिकी (मुख्य अभियंता) का एक पद खाली।
-अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सिविल) का एक पद वह भी रिक्त।
-अधिशाषी अभियंता (सिविल) 6 में से 2 पद खाली।
-कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 24 में से सिर्फ 4 पद भरे, 20 खाली।
-कनिष्ठ अभियंता (विद्युत) के सभी 6 पद रिक्त।
-लेखा शाखा में सहायक लेखाधिकारी, वरिष्ठ लेखाधिकारी सहित कई पद रिक्त हैं।
-विधि शाखा में वरिष्ठ और कनिष्ठ विधि अधिकारी के कुल 6 पद खाली पड़े हैं।
-नगर नियोजक, उप नगर नियोजक और सहायक नगर नियोजक के भी कई पद रिक्त हैं।

प्रशासनिक और फील्ड स्टॉफ भी अधूरा

-कनिष्ठ सहायक के 25 में से सिर्फ 2 पद भरे गए हैं।
-चालक के 11 में से 9 पद खाली हैं।
-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 22 में से 12 पद रिक्त हैं।
-सूचना सहायक, उद्यान निरीक्षक, सहायक उद्यान निरीक्षक जैसे पद भी लंबे समय से खाली हैं।

पुलिस के 11 पद स्वीकृत, मात्र एक आरपीएस लगाया

अवैध निर्माण, अतिक्रमण और भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए यूडीए के पास खुद का पुलिस बल नहीं है। इस कारण यूडीए अधिकारियों और कार्मिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बिगड़ने का जोखिम बना रहता है। स्थिति यह है कि यूडीए के लिए पुलिस के 11 पद स्वीकृत होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हुईं।

हाल ही में एक मात्र आरपीएस अधिकारी की नियुक्ति जरूर हुई है। कांस्टेबल समेत शेष पदों पर अब भी नियुक्ति का इंतजार है। यूडीए के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है। कई बार विरोध, हंगामा और राजनीतिक दबाव भी सामने आता है। बिना पुलिस बल के मौके पर उतरना जोखिम भरा होता है।

Updated on:
01 Feb 2026 02:11 pm
Published on:
01 Feb 2026 02:11 pm