
उदयपुर। साइबर ठगों ने उदयपुर के 72 वर्षीय बुजुर्ग को करीब 11 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 40 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी और जांच अधिकारी बताकर बुजुर्ग को ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में फंसाने का डर दिखाया। पहले आधार कार्ड के दुरुपयोग और दूसरे सिम से महिलाओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजने की बात कही और 20 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद संयुक्त खाते से ट्रांजेक्शन जरूरी बताते हुए पत्नी के खाते से भी 20 लाख रुपए आरटीजीएस करा लिए।
मामले में इन्द्रप्रस्थ कॉम्प्लेक्स सेक्टर-14 निवासी कैलाशचन्द्र त्रिपाठी ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार 18 सितंबर को उनके मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को डीओटी की नोटिफिकेशन यूनिट का राकेश कुमार बताया। उसने कहा कि बुजुर्ग के आधार कार्ड का दुरुपयोग कर दूसरा सिम जारी किया गया है और उस नंबर से महिलाओं को अभद्र मैसेज भेजे गए हैं। कॉलर ने इस मामले में बेंगलूरु के इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने की बात कही।
इसके बाद कॉल करने वाले ने कथित उच्चाधिकारी और जांच अधिकारी के तौर पर मनोज कुमार से वॉट्सऐप कॉल पर बातचीत करवाई। 21 सितंबर को मनोज कुमार ने बुजुर्ग का आधार नंबर वेरिफाई किया। इसके बाद उन्हें कथित ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में फंसने का डर दिखाया गया। आरोपियों ने मामला पुणे के उच्चाधिकारी और सीबीआई अधिकारी दया नायक को ट्रांसफर करने की बात कही।
इसके बाद दया नायक के नाम से बातचीत करते हुए बुजुर्ग को बताया गया कि उनके आधार का इस्तेमाल कर मुंबई की केनरा बैंक शाखा में खाता खोला गया है। इस खाते से कथित ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट से जुड़े 133 ट्रांजेक्शन होने की बात भी कही गई।
ठगों ने बुजुर्ग को 133 ट्रांजेक्शन के बराबर रकम उनके बताए खाते में जमा कराने के लिए कहा। डर के कारण बुजुर्ग ने 25 सितंबर को आरटीजीएस के जरिए 20 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद भी ठगों ने उन्हें नहीं छोड़ा। उन्होंने संयुक्त खाते से भी एक ट्रांजेक्शन करना जरूरी बताया।
इसके बाद 28 सितंबर को बुजुर्ग ने पत्नी राजरानी त्रिपाठी के साथ संयुक्त खाते से 20 लाख रुपए की दूसरी आरटीजीएस कर दी। इस तरह 11 दिनों के दौरान साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती से कुल 40 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए।