
उदयपुर. उदयपुर डेयरी में करीब 25 लाख रुपए मूल्य के 250 कट्टे दुग्ध पाउडर के कथित गबन तथा 35 से 37 लाख रुपए मूल्य के घी के स्टॉक में कमी के बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि यदि शिकायतकर्ता जांच अधिकारी के समक्ष कोई दस्तावेज, साक्ष्य या अन्य सामग्री प्रस्तुत करता है तो उस पर कानून के अनुरूप विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एसपी और जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष व साक्ष्य लिखित रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति दी।
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की एकलपीठ ने एस.बी. आपराधिक विविध (याचिका) संख्या 5975/2026 की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका कोट दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड के अध्यक्ष भेरूलाल पटेल ने अधिवक्ता भवित शर्मा के माध्यम से धारा 528 के तहत याचिका दायर की। याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक उदयपुर, गोवर्धन विलास थाना प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
250 कट्टे दुग्ध पाउडर हुआ गायब, अहमदाबाद भेजने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया कि उदयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष डालचंद डांगी, पूर्व प्रबंध निदेशक विपिन शर्मा, स्टोर प्रभारी कन्हैयालाल डांगी तथा संयंत्र प्रभारी वीके व्यास की मिलीभगत से 23 जुलाई 2025 को ट्रांसपोर्ट नगर, प्रतापनगर स्थित वेयरहाउस से 250 कट्टे दुग्ध पाउडर का गबन किया। हर कट्टा 25 किलो का था और 6250 किलोग्राम दुग्ध पाउडर की बाजार कीमत करीब 25 लाख रुपए थी। शिकायत में बताया कि प्लांट की आवश्यकता बताकर कार्यालय आदेश संख्या 1402 जारी किया गया, जिसके अनुसार वाहन संख्या जीजे-01-डीजेड-0712 से दुग्ध पाउडर वेयरहाउस से उदयपुर डेयरी भेजा जाना था। आरोप है कि वाहन डेयरी पहुंचने के बजाय खांडी ओवरी टोल प्लाजा (खेरवाड़ा) से गुजरते हुए सीधे अहमदाबाद की ओर चला गया। शिकायतकर्ता ने कार्यालय आदेश, वेयरहाउस गेट पास और टोल पर्ची को साक्ष्य के रूप में पेश किया।
400 टीन घी की कमी भी आई थी सामने
याचिका में डेयरी के स्टॉक में 15-15 लीटर क्षमता के करीब 400 टीन घी कम पाए जाने का आरोप लगाया है, जिसकी अनुमानित कीमत 35 से 37 लाख रुपए बताई है। इन आरोपों के आधार पर गोवर्धन विलास थाना में एफआईआर दर्ज की गई। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक दिनेश कुमार गोदारा ने न्यायालय को बताया कि पुलिस पहले से ही निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कर रही है। यदि याचिकाकर्ता जांच पूरी होने से पहले कोई अतिरिक्त दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करता है तो उस पर विधि के अनुसार विचार किया जाएगा।