Rajasthan : जी हां… आपने सही पढ़ा है। अब भूसे से भी मोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्ज होंगी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि (एमपीयूएटी) उदयपुर के रिन्यूएबल एनर्जी डिपार्टमेंट में हुए शोध ने यह कर दिखाया है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे एग्रीकल्चर वेस्ट यानी भूसे का उपयोग करके लिथियम आयन बैटरी का एनोड तैयार किया गया है। देश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है, जिसमें महंगे और आयात पर निर्भर रहने वाले ग्रेफाइट को पूरी तरह से 'ऑर्गेनिक कार्बन' से रिप्लेस किया गया है। यानी अब बैटरी खेती से निकले कचरे से चलेगी और खराब होने के बाद भी इसकी एनोड छड़ पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल होगी। कुलगुरु प्रताप सिंह ने बताया कि विवि को शोध के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के 'कंसोर्टियम रिसर्च प्लेटफॉर्म के जरिए 3 साल पहले 20 लाख रुपए की ग्रांट मिली थी।