उदयपुर जिले के मानपुर गांव के किसान नानालाल पटेल ने सरकारी योजना का लाभ लेकर अपने खेत में पक्का फार्म पॉण्ड बनाकर जल संरक्षण की मिसाल पेश की है। इससे सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा, फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि होगी तथा लागत में कमी आएगी। फार्म पॉण्ड से भू-जल स्तर सुधार, अतिरिक्त आय के रूप में मछली पालन और क्षेत्र के किसानों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
Udaipur News: जल ही जीवन का आधार है। जल है तो कृषि है, कृषि है तो जीवन है। यहीं मूल मंत्र अपनाकर उदयपुर जिले की फलासिया पंचायत समिति क्षेत्र के मानपुर गांव के एक किसान ने जल संरक्षण की दिशा में पेश की मिसाल है।
मानपुर गांव के निवासी किसान नानालाल पुत्र खेमा पटेल ने अपने खेत पर पक्का फार्म पॉण्ड बनाकर न केवल अपनी खेती को स्थायित्व दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों को प्रोत्साहित किया है। 8वीं कक्षा तक पढ़े किसान नानालाल ने यह साबित कर दिया कि जागरूक किसान सरकारी योजना का लाभ लेकर फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर अपनी तकदीर बदल सकता है।
सहायक कृषि अधिकारी पानरवा ललित कुमार गरासिया ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में किसान नानालाल ने कृषि विभाग की योजना के तहत फार्म पॉण्ड निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्होंने विभागीय मार्गदर्शन में 20x20x3 मीटर आकार का कुल 1200 घन मीटर क्षमता वाला पक्का फार्म पॉण्ड तैयार कराया।
फार्म पॉण्ड बनने के बाद किसान को सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध रहेगा। पानी की नियमित उपलब्धता से फसलों की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रति हैक्टेयर उत्पादन भी बढ़ेगा। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा। सहायक कृषि अधिकारी गरासिया का कहना है कि क्षेत्र के अन्य किसान भी इसी प्रकार योजनाओं का लाभ लें, तो जल संरक्षण और आय वृद्धि दोनों संभव हैं।
फार्म पॉण्ड निर्माण के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए फार्म पॉण्ड के चारों ओर मजबूत जालीदार बाड़ लगाई गई है। इससे पशु-पक्षियों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
क्षेत्र में सिंचाई के संकट का सामना कर रहे किसानों के लिए फार्म पॉण्ड वर्षा जल संचयन का सशक्त माध्यम बनेगा। बरसात के दौरान खेतों में बहने व भरने वाले पानी को फार्म पौण्ड में संग्रहित किया जाता है। संग्रहित पानी का उपयोग बाद में सिंचाई में किया जाता है। कई बार फसलों को जीवन रक्षक सिंचाई देने में यही पानी काम आता है, इससे फसलें सूखती नहीं है। जिससे फसल उत्पादन में स्थिरता बनी रहेगी।
पक्के फार्म पॉण्ड आसपास के क्षेत्र में भू-जल स्तर को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। वर्षा का पानी संरक्षित होकर धीरे-धीरे जमीन में समाहित होता है। जिससे कुओं और ट्यूबवेल में जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है। दीर्घकाल में यह कदम पूरे क्षेत्र की जल समस्या को कम करने में योगदान देगा।
किसान नानालाल ने बताया कि वे भविष्य में फार्म पॉण्ड का उपयोग मछली पालन के लिए भी करेंगे। इससे खेती के साथ एक अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित होगा। कृषि विभाग की योजना के तहत 1 लाख 35 हजार रुपए तक की अनुदान राशि का प्रावधान है।
फार्म पॉण्ड से स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। फार्म पॉण्ड के आसपास नमी रहने से एक अनुकूल सूक्ष्म जलवायु विकसित होगी। इससे आसपास के खेतों और पौधों को लाभ मिलता है।
फार्म पॉण्ड बनने से किसानों की बोरवेल पर निर्भरता कम होगी। इससे बिजली और डीजल की खपत में कमी आएगी। किसान फार्म पॉण्ड के साथ सोलर सिस्टम लगाकर दिन के समय में सिंचाई कर सकेंगे। सिंचाई की लागत घटने से खेती अधिक लाभकारी साबित होगी।
मानपुर और आसपास के गांवों के किसान इस फार्म पॉण्ड को देखने पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और किसान आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे।