आईसीयू ऑन व्हील या क्रिटिकल नाम से चलने वाली एम्बुलेंस फर्जी, स्वास्थ्य मंत्रालय ने नहीं दे रखा अधिकार
मोहम्मद इलियास/उदयपुर. गाड़ी में न तो चिकित्सक न ही मरीज को बचाने के लिए आईसीयू में मिलने वाली कोई सुविधा, बस एक ऑक्सीजन सिलेंडर, इसीजी मशीन-मॉनीटर और दिखावे के लिए कुछ उपकरण और नाम दे दिया आईसीयू ऑन व्हील। राजस्थान पत्रिका द्वारा इसका खुलसा करने के बाद परिवहन विभाग ने धरपकड़ करते हुए एम्बुलेंस से इन आईसीयू को हटवाया तो संचालकों ने उसे क्रिटीकल केयर एम्बुलेंस का नाम देकर फिर भ्रमित कर दिया अवैध वसूलियां चालू कर दी। इस संबंध में भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में लगी एक आरटीआई में भी आईसीयू, क्रिटीकल व अन्य किसी नाम की एम्बुलेंस होने से साफ इनकार किया गया।
आईसीयू ऑन व्हील नाम की एम्बुलेंस का परिवहन विभाग कार्यालय में ना तो कोई रजिस्ट्रेशन है ना ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पास कोई रिकॉर्ड। धरपकड़ हुई तो अब नाम बदल दिया गया। अभी एडंवास एम्बुलेंस के नाम से संचालक सामान्य एम्बुलेंस के किराये से तीन से चार गुना अधिक वसूली करते हुए सरेआम ठगी कर रहे है। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिाका ने गत दिनों नाम आईसीयू ऑन व्हील और सुविधा सामान्य एम्बुलेंस की शीर्षक से खबर का प्रकाशन कर इस गोरखधंधे को उजागर किया था।
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अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मना कर दिया
उदयपुर के एक अधिवक्ता नरेंद्र प्रजापत ने भारत सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय में एक ऑनलाइन आरटीआई भी लगाई। इसमें प्रारंभिक जवाब में आईसीयू ऑन व्हील नामक किसी भी एम्बुलेंस की जानकारी होने से इनकार किया है। जिसका अर्थ यह है कि आईसीयू ऑन व्हील या क्रिटिकल केयर नाम से एम्बुलेंस चलाने हेतु न तो कोई स्वीकृति है और न ही कोई मापदंड। इसके बावजूद मेडिकल क्षेत्र में इन भ्रामक शब्दों का उपयोग कर मरीजों व उनके तिमारदारोंं को गुमराह किया जा रहा है।
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पूर्व में सीएमएचओ भी मना कर चुके
ंन्यू भूपालपुरा निवासी जयवंत भेरवियां ने सूचना के अधिकार में स्वीकृत आईसीयू ऑन व्हील, क्रिटिकल केयर यूनिट एम्बुलेंस की सूची के साथ ही सीएमएचओ कार्यालय की ओर से संस्थाओं, हेल्थ केयर कंपनियों को दी गई स्वीकृृति की सूची मांगी गई। सीएमएचओ कार्यालय की ओर से ऐसी किसी भी एम्बुलेंस के होने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि आईसीयू के नाम से ऐसी कोई एम्बुलेंस ही नहीं है तो उनकी नियमों कानून की पालना व किराया भी तय नहीं किया जा सकता। परिवहन विभाग के पास भी भी ऐसी एम्बुलेंसों को रजिस्टे्रशन नहीं है।