उदयपुर

राजस्थान में आवासन मंडल का ‘खेल’, 2013 की लॉटरी का अब तक पता नहीं, उसी जमीन पर नई स्कीम लाने की क्या है मजबूरी?

Housing Board Dispute: उदयपुर के पानेरियों की मादड़ी में 2013 की आवासन मंडल योजना 11 साल बाद भी अधूरी है। लॉटरी के बाद पैसा जमा कराने वाले सैकड़ों लोग मकान के इंतजार में हैं। जमीन विवाद में फंसी योजना के बीच उसी क्षेत्र में नई योजना की तैयारी से आक्रोश बढ़ा।
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Mar 24, 2026
Udaipur Housing Board Dispute
राजस्थान आवासन मंडल की इस योजना ने तोड़ी आम आदमी की कमर (पत्रिका फाइल फोटो)

Udaipur Housing Board Dispute: उदयपुर: सपनों का घर दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए जमा करवाने वाला राजस्थान आवासन मंडल अपनी ही योजनाओं के जाल में उलझ गया है। पानेरियों की मादड़ी क्षेत्र में वर्ष 2013 में निकाली गई स्ववित्त पोषित आवासीय योजना के आवेदक आज भी मकान मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

लॉटरी निकले 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन योजना जमीन विवाद में उलझकर अटक गई और सैकड़ों लोगों की जमा पूंजी फंस गई। हैरानी की बात यह है कि जिस क्षेत्र में पुरानी योजना का मामला अब तक सुलझ नहीं पाया, उसी पानेरियों की मादड़ी इलाके में आवासन मंडल अब नई आवासीय योजना लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले से पैसे जमा कर चुके लोगों में आक्रोश और असमंजस की स्थिति बन गई है।

सपनों का घर दिखाकर कराया निवेश

राजस्थान आवासन मंडल ने वर्ष 2013 में स्ववित्त पोषित योजना के तहत पानेरियों की मादड़ी क्षेत्र में एमआईजी सहित विभिन्न श्रेणी के फ्लैट्स के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। प्रचार के दौरान लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि मंडल की ओर से बनाए गए फ्लैट खरीदने से उन्हें अलग से भूखंड खरीदने, निर्माण कराने और सामग्री जुटाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही आधुनिक डिजाइन, बेहतर सुविधाओं और सुव्यवस्थित कॉलोनी का सपना दिखाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

2013 में निकली लॉटरी, 2026 में भी इंतजार

आवासन मंडल ने 12 सितंबर 2013 को योजना की लॉटरी निकाली थी। लॉटरी में चयनित लोगों ने तय राशि भी जमा करवा दी, लेकिन एक दशक से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी मकानों का आवंटन नहीं हो सका। आवेदकों का कहना है कि वे पिछले 11 वर्षों से लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।

जीवन की जमा पूंजी लगा दी

योजना में शामिल कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की बचत इस उम्मीद में लगा दी थी कि कुछ वर्षों में अपना घर मिल जाएगा। एक आवेदक ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने भरोसा दिलाया था कि तय समय में मकान मिल जाएगा। हमने अपनी बचत और कर्ज लेकर पैसा जमा किया, लेकिन 11 साल बाद भी घर नहीं मिला। अब समझ नहीं आ रहा कि न्याय कहां मिलेगा।

जिम्मेदार कौन?

  • जब जमीन विवादित थी तो उस पर योजना कैसे शुरू कर दी गई?
  • योजना शुरू करने से पहले जमीन की कानूनी स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई?
  • 11 साल से इंतजार कर रहे आवेदकों को अब तक राहत क्यों नहीं मिली?
  • पुरानी योजना अधूरी फिर भी उसी इलाके में नई योजना क्यों?

पानेरियों की मादड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित

आवासन मंडल ने हाल में उदयपुर सहित कई शहरों में नई आवासीय योजना की घोषणा की। इनमें पानेरियों की मादड़ी में नई योजना प्रस्तावित बताई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब पुराने आवेदकों को मकान नहीं मिले तो उसी इलाके में नई योजना कैसे शुरू की जा रही है।

विभाग का दावा, बाद में हुआ विवाद

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के समय जमीन पर कोई विवाद नहीं था। बाद में कुछ लोग कोर्ट गए। अधिकारियों के अनुसार विवादित जमीन को अलग रख योजना को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।

Updated on:
24 Mar 2026 11:54 am
Published on:
24 Mar 2026 11:54 am