
उदयपुर: जगदीश चौक स्थित आसींद की हवेली की पार्किंग में कर्मचारियों ने महापौर पारस सिंघवी से ही दोपहिया वाहन खड़ा करने के निर्धारित 2 रुपए के बजाय 20 रुपए वसूल लिए। हद तो तब हो गई, जब राशि लेने के बावजूद रसीद भी नहीं दी गई। महापौर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नगर निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया और संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। नया टेंडर होने तक पार्किंग का संचालन नगर निगम अपने कर्मचारियों के माध्यम से करवाएगा।
बताया जा रहा है कि महापौर पारस सिंघवी मंगलवार शाम पूर्व महिला पार्षद के परिवार में आयोजित उठावणे में शामिल होने जगदीश चौक पहुंचे थे। उनके साथ पार्षद विजय आहूजा, वैभव भंडारी सहित अन्य पार्षद भी थे। महापौर स्वयं स्कूटर लेकर आसींद की हवेली के ऊपरी तल पर संचालित पार्किंग में पहुंचे और अपना वाहन खड़ा किया। इस दौरान वहां मौजूद दो कर्मचारियों ने उनसे पार्किंग शुल्क के रूप में 20 रुपए मांगे, जबकि दुपहिया वाहन के लिए निर्धारित दर केवल 2 रुपए है।
उदयपुर महापौर ने राशि देने के बाद रसीद मांगी तो कर्मचारियों ने रसीद नहीं होने की बात कही। मौके पर पार्किंग शुल्क की निर्धारित दरों की सूची भी नहीं लगी थी। महापौर ने कहा कि जब ठेकेदार के कर्मचारी उनसे ही निर्धारित शुल्क से दस गुना अधिक राशि वसूल रहे हैं और रसीद तक नहीं दे रहे हैं, तो आम शहरवासियों और पर्यटकों के साथ कैसा व्यवहार होता होगा। इसके बाद उन्होंने तत्काल नगर निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया।
महापौर की सूचना पर राजस्व अधिकारी नितेश भटनागर, राजस्व निरीक्षक विजय जैन और निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान पार्किंग शुल्क की दरें प्रदर्शित नहीं होने, निर्धारित राशि से अधिक वसूली और कर्मचारियों के व्यवहार से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं। इस पर महापौर ने संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।
महापौर ने कहा कि जगदीश चौक शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ऐसे स्थान पर पार्किंग शुल्क की स्पष्ट जानकारी देना और लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना जरूरी है। निर्धारित दरों से अधिक वसूली और अभद्रता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। नया टेंडर होने तक नगर निगम अपने कर्मचारियों के माध्यम से पार्किंग का संचालन करवाएगा।