उदयपुर

Rajasthan News: पेट्रोल-डीजल पर नया संकट! कीमतों के बाद अब सप्लाई लिमिट, बाजार में शॉर्टेज से बढ़ी परेशानी

Petrol diesel News Update: पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और बिक्री को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं। तेल कंपनियों की ओर से डिपो से सीमित आपूर्ति, उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में ही ईंधन देने और लगातार बढ़ती मांग ने नया संकट खड़ा कर दिया है।

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May 17, 2026
शहर में पेट्रोल पंपों पर लर रही हैं कतार। फोटो पत्रिका

उदयपुर। पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और बिक्री को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं। तेल कंपनियों की ओर से डिपो से सीमित आपूर्ति, उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में ही ईंधन देने और लगातार बढ़ती मांग ने नया संकट खड़ा कर दिया है। हालात यह हैं कि कंपनियां अब भी वर्ष 2025 के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर पेट्रोल पंपों को उतनी ही सप्लाई दे रही हैं, जबकि इस वर्ष बिक्री में अचानक भारी उछाल आया है। संचालकों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के दामों में तीन रुपए से अधिक की बड़ी बढ़ोतरी के बाद भी आने वाले दिनों में कीमतें दो से तीन चरणों में और बढ़ने की आशंका है।

निजी पेट्रोल कंपनियों के पहले से ही अधिक दाम बढ़ाने से ज्यादातर ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों के पंपों की ओर मुड़ गए। इससे सरकारी पंपों पर बिक्री दबाव कई गुना बढ़ गया। इस बीच अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे माहौल के चलते औद्योगिक ईंधन आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

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उद्योग को पहले कम दाम में मिलता था पेट्रोल, अब लगाया सरचार्ज

पहले उद्योगों को सामान्य दरों से पांच से छह रुपए कम पर बड़े टैंकरों में पेट्रोल-डीजल उपलब्ध होता था। उद्योग जरूरत के अनुसार स्टॉक भी करते थे, पर 20 मार्च से इंडस्ट्रियल सप्लाई पर सरचार्ज लगा दिया, जो अब करीब 20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इसके बाद उद्योगों ने सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया। यहीं से बाजार में असली दबाव पैदा हुआ। उद्योगों, ठेकेदारों और मशीन ऑपरेटरों ने बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल पंपों से लेना शुरू कर दिया। बोरिंग मशीनों, निर्माण कार्यों और औद्योगिक उपयोग में एक बार में हजारों लीटर ईंधन की जरूरत होती है। तेल कंपनियों ने इस पर भी अनौपचारिक नियंत्रण शुरू कर दिया। कई पंप संचालकों का कहना है कि यदि तय सीमा से अधिक बिक्री होती है तो सप्लाई रोक दी जाती है या अगले ऑर्डर ब्लॉक कर दिए जाते हैं।

पेट्रोल-डीजल संकट की मुख्य वजह

-तेल कंपनियां अब भी 2025 के पुराने डेटा के हिसाब से सप्लाई दे रही हैं
-इस वर्ष सरकारी पंपों पर बिक्री अचानक कई गुना बढ़ी

-निजी कंपनियों के महंगे रेट के कारण ग्राहक सरकारी पंपों की ओर मुड़े
-युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय हालात से इंडस्ट्रियल ईंधन सप्लाई प्रभावित हुई

-उद्योगों ने सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू किया
-सप्लाई कम, मांग ज्यादा,पंपों पर विवाद की स्थिति

-आने वाले दिनों में दो से तीन चरणों बढ़ सकते है दाम
-परिवहन और निर्माण लागत बढ़ने की संभावना

नई कीमतों ने बढ़ाई चिंता

ईंधन----- पुरानी कीमत--- नई कीमत--- बढ़ोतरी
पेट्रोल---- 105.54--------- 108.79------3.25
डीजल-----90.96---------93.98 ------3.02
पावर पेट्रोल---115.19----- 118.43----- 3.24

पंप संचालकों की परेशानी

-ज्यादा बिक्री पर अगली सप्लाई रोकने की चेतावनी
-ऑर्डर ब्लॉक होने का डर
-ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़े

सबसे ज्यादा ये प्रभावित

उद्योग, निर्माण कंपनियां, फैक्ट्रियां, बोरिंग मशीन संचालक, मशीनरी आधारित ठेकेदार, किसान,सिंचाई और कृषि उपकरणों में डीजल संकट, लागत बढ़ने से खेती प्रभावित होने की आशंका, मशीन ऑपरेटर, बोरिंग मशीन ऑपरेटर।

शहर में रोजाना खपत और सप्लाई का गणित

-100 केएल (किलोलीटर) पेट्रोल की औसत दैनिक खपत

-150 केएल- डीजल की औसत दैनिक खपत

-40 पेट्रोल पंप नगर निगम सीमा क्षेत्र में

-3 से 10 केएल प्रति पंपपंपों की भंडारण क्षमता

पहले और अब की स्थिति में बड़ा बदलाव

-पहले सभी पंपों पर लगभग 5 दिन का स्टॉक उपलब्ध रहता था

-अब स्थिति बिगड़कर डेड स्टॉक यानी न्यूनतम या खत्म स्टॉक तक पहुंच गई

-कई पंपों पर ईंधन की आपूर्ति अनियमित और सीमित हो गई

-एडवांस भुगतान के बावजूद सप्लाई में अनिश्चितता

-कई पंप संचालकों के अनुसार ऑर्डर देने के बाद भी समय पर माल नहीं मिल रहा

-अधिक कीमतों के कारण ग्राहकों ने प्राइवेट पंपों से दूरी बना ली

-मांग घटने से कई प्राइवेट पंपों पर स्टॉक नहीं बचा

-कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद करने की स्थिति बन गई

-सरकारी पंपों पर भीड़ और खपत बढ़ी

-पूरे शहर में ईंधन आपूर्ति व्यवस्था दबाव में

बाजार में शुरू हुआ नया जुगाड़ मॉडल

पेट्रोल-डीजल की अनौपचारिक लिमिट के बीच अब बाजार में नया जुगाड़ मॉडल शुरू हो गया। लोग अलग-अलग गाड़ियों में बार-बार टैंक फुल करवाकर बाद में ईंधन निकालकर स्टोर कर रहे हैं। छोटे-छोटे हिस्सों में खरीद बढ़ने से पंपों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। निर्माण कंपनियां, बोरिंग मशीन संचालक और बड़े उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बड़ी मात्रा में डीजल नहीं मिलने पर वे कई वाहनों के जरिए ईंधन जुटा रहे हैं।

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