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राजस्थान में पेट्रोल पंपों की बड़ी चोरी उजागर: 7 संभागों में 16 नोजल सील; हर महीने 700 लीटर तक कम दे रहे थे पेट्रोल

विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ ने गत 13-14 मई को जयपुर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग में चुनिंदा पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया। 13 पेट्रोल पंपों पर नोजल से निकाले गए पेट्रोल-डीजल को सत्यापित जार से मापा गया तो 30 एमएल तक इन उत्पादों की मात्रा कम मिली।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 17, 2026

Petrol Pump Fraud Rajasthan

एक पेट्रोल पंप पर जांच करती टीम (पत्रिका फोटो)

जयपुर: राजस्थान के वाहन चालकों की जेब पर डाका डालने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ की टीमों ने प्रदेश के 7 संभागों में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए 13 पेट्रोल पंपों पर बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। ये पंप संचालक हर महीने उपभोक्ताओं को चूना लगाकर 700 लीटर तक पेट्रोल-डीजल कम दे रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए 16 नोजल को सील (सीज) कर दिया है।

बता दें कि यह पूरी कार्रवाई खाद्य मंत्री सुमित गोदारा के निर्देशों पर अंजाम दी गई, जिसके बाद शनिवार को इस कार्रवाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया गया।

7 संभागों में औचक निरीक्षण, ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ की अलग-अलग टीमों ने गत 13 और 14 मई को प्रदेश के जयपुर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग में चुनिंदा पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान जब अधिकारियों ने नोजल से निकलने वाले पेट्रोल और डीजल को सरकार द्वारा सत्यापित जार (मापक) से मापा, तो सच सामने आ गया। इन पंपों पर प्रति माप 30 एमएल (मिलीलीटर) तक पेट्रोल-डीजल कम पाया गया।

हर महीने 20 हजार तक की अवैध कमाई, लगा जुर्माना

जांच में सामने आया कि यह घटतौली कोई मामूली भूल नहीं बल्कि सोची-समझी हेराफेरी थी। कम तेल देकर ये पंप संचालक हर महीने करीब 700 लीटर तक पेट्रोल-डीजल बचा रहे थे। इस घटतौली के जरिए हर पंप संचालक उपभोक्ताओं की जेब से हर महीने 15 से 20 हजार रुपए की अवैध कमाई कर रहा था। विभाग ने इन सभी गड़बड़ी वाले पंपों के 16 नोजल सीज कर दिए हैं और दोषियों पर 5 से 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया गया है।

नुकसान का गणित: समझिए आपकी जेब पर कैसे डाला डाका?

खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने इस पूरे फर्जीवाड़े के गणित को समझाते हुए बताया कि 30 एमएल की मात्रा इतनी कम होती है कि आम उपभोक्ता को नंगी आंखों से इसका अंतर कभी दिखाई नहीं देता। लेकिन बड़े स्तर पर यह बहुत बड़ा नुकसान है। पंपों पर प्रत्येक 5 लीटर की रीड़िंग पर 30 एमएल पेट्रोल कम दिया जा रहा था।

अगर कोई उपभोक्ता अपनी कार में 50 लीटर पेट्रोल भरवाता है, तो उसे सीधे तौर पर 300 एमएल पेट्रोल कम मिलता है। यदि आपकी कार का माइलेज 15 किलोमीटर प्रति लीटर है, तो इस चोरी गए 300 एमएल पेट्रोल से आपकी कार आसानी से 4 से 5 किलोमीटर तक और चल सकती थी। यानी हर फुल टैंक पर आपको सीधे 5 किलोमीटर के सफर का नुकसान हो रहा था।

खाद्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई से प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले पंपों के खिलाफ आगे भी ऐसी औचक निरीक्षण की कार्रवाई जारी रहेगी।