उदयपुर जिले के सुखवाड़ा गांव के विक्रम सिंह ने आर्थिक तंगी और संघर्षों के बावजूद फिटनेस के जुनून से सोशल मीडिया पर पहचान बनाई। मां के झुमके बेचकर मिला मोबाइल उनकी राह बना। आज लाखों फॉलोअर, करोड़ों व्यूज और यूट्यूब के गोल्ड-सिल्वर प्ले बटन के मालिक हैं।
उदयपुर: "मेरी मंजिल मेरा हौंसला देखकर, डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर, खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर" किसी कवि की लिखी इन चंद पंक्तियों के जरिए हम आपको वाकिफ करा रहे हैं, एक ऐसे ठेठ देहाती युवक की बेहद रोचक और प्रेरणादायी कहानी से, जिसने जुनून और जज्बे से न केवल हालात को हरा दिया, बल्कि कड़ी मेहनत से कामयाबी का ऐसा सफर तय किया कि अब वह सोशल मीडिया पर हीरो है। इसके 10 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर हैं।
आइए रूबरू कराते हैं सोशल मीडिया की इस शख्सियत से, नाम है विक्रम सिंह। उदयपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर सुखवाड़ा गांव का बाशिंदा। पिता किसान और मां गृहणी। घर की आर्थिक हालत ऐसी कि ज्यादा पढ़ना-लिखना संभव नहीं था। 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ नौकरी करनी पड़ी। महज सात साल का संघर्ष भरा सफर तय करने के बाद अब विक्रम कामयाबी के रास्ते पर अडिग है।
कभी साढ़े तीन हजार की नौकरी के लिए मुंबई जाना पड़ा था। अब हर महीने लाखों कमाता है। ग्रामीण युवाओं का रोल मॉडल बने महज 24 साल के इस युवा के अब सोशल मीडिया पर लाखों दीवाने हैं। वह फिटनेस और डाइट की टिप्स देता है।
घर की परिस्थतियों के कारण विक्रम ने 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। 2014-15 में वह किसी रिश्तेदार के साथ मुंबई चला गया। साढ़े तीन हजार रुपए में नौकरी शुरू की। एक परिचित के साथ किराए के छोटे से कमरे में रहने लगा। पार्टनर को फिटनेस का शौक था, जिम जाने के तो पैसे नहीं थे।
इसलिए पार्टनर के कहने पर कमरे को ही जिम बना लिया। यह सिलसिला कई महीनों तक चला। उसे यहीं से फिटनेस का शौक लगा। तीन साल तक उसने मुंबई में नौकरी की। पैसों की बचत नहीं हो रही थी। इस कारण 2016 में दोबारा गांव आ गया।
आर्थिक तंगी और नौकरी के संघर्ष के बीच भी विक्रम ने अपना शौक नहीं छोड़ा। उसने घर के एक कोने में जुगाड़ से जिम बनाई। सीमेंट के डंबल तैयार किए। बारबल की रॉड बनाई। नौकरी पर जाने से पहले वह सुबह-सुबह जिम में अभ्यास जरूर करता था। चार भाई और एक बहन भी उसकी हरसंभव मदद को तैयार रहते।
विक्रम को अब ऐसे मोबाइल की जरूरत थी, जिससे वह वीडियो बना सके। वह कम उम्र में भी जिम्मेदार था। इस कारण मां ने अपना झुमका बेचकर बेटे की ख्वाहिश पूरी की। नया मोबाइल मिलने के बाद तो विक्रम जब भी समय मिलता फिटनेस से जुड़े वीडियो बनाने के टिप्स सीखता।
धीरे-धीरे वह खुद एक्सपर्ट बन गया। उसने अपने घर में जुगाड़ की जिम में वीडियो बनाने शुरू किए। खुद का चैनल बनाया। कोविड के दौरान उसने नौकरी छोड़ी और इसी काम में जुट गया। पहली बार 100 डॉलर की कमाई हुई तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। पहली कमाई उसने मां के हाथों में थमाई। विक्रम को मलाल है कि वह मां का वही झुमका तो दोबारा नहीं ला सका, क्योंकि वह किसी ने आगे खरीद लिया था। लेकिन, अब मां की हर ख्वाहिश पूरी कर रहा है।
कहते हैं सीखने की ललक हो तो कोई मंजिल दूर नहीं। विक्रम की इसी खूबी ने एक दिन उसे कामयाब बना दिया। मुंबई से गांव लौटने के बाद विक्रम ने उदयपुर में एक ऑटो पार्ट्स की दुकान पर नौकरी ज्वाइन की। शाम को घर चला जाता था। सुबह-शाम गांव से उदयपुर और उदयपुर से गांव जाते वक्त बस में वह सोशल मीडिया पर फिटनेस से जुड़े वीडियो देखता रहता था। धीरे-धीरे उसकी यह ललक बढ़ती गई। वह निरंतर नए-नए टिप्स सीखता रहता था। हालांकि, उस वक्त उसके पास ढंग का मोबाइल नहीं था।
विक्रम की जिम में अब सभी उपकरण हैं। 10 लाख से ज्यादा उसके फॉलोअर हैं। हर महीने ढाई से तीन लाख रुपए कमाता है। गांव में उसी जिम को अब व्यवस्थित बनाया है और गांव के युवाओं को निशुल्क कोचिंग दे रहे हैं। उसकी सफलता से गांव के युवक भी प्रेरित हैं।
विक्रम का कहना है कि कोई भी सफलता रातों-रात नहीं मिलती। धैर्य और लगन से युवाओं को अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहना चाहिए। विक्रम अब सोशल मीडिया पर स्टार है। पिता जुगत सिंह और मां को बेटे पर नाज है। उसके पास यूट्यूब के 6 गोल्ड प्ले बटन और 14 सिल्वर प्ले बटन है।