Vishwa Guru Chulha : राजस्थान के उदयपुर के एक 'देसी इंजीनियर' ने अपनी जादुई कारीगरी से दुनिया को अचंभित कर दिया है। इसे आप राजस्थान का जुगाड़ कहें या विज्ञान का चमत्कार, लेकिन 'विश्व गुरु चूल्हा' आज अमेरिका और अफ्रीका तक अपनी धमक मचा रहा है।
राजस्थान के ढाबों पर दाल-बाटी का स्वाद चखने वालों ने अक्सर देखा होगा कि बाटी एक चूल्हे पर और दाल दूसरे पर बनती है, जिसमें लकड़ियों की भारी बर्बादी होती है। इसी समस्या का हल निकाला है उदयपुर के रहने वाले मोहम्मद शेर खान ने। केवल आठवीं तक पढ़े शेर खान ने एक ऐसा 3-In-1 चूल्हा तैयार किया है, जो होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट चलाने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
शेर खान का यह आविष्कार तीन लेयर में काम करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक ही समय में तीन अलग-अलग काम हो सकते हैं:
ग्रामीण इलाकों और ढाबों में सबसे बड़ी समस्या धुएं की होती है। शेर खान के इस पेटेंटेड चूल्हे में लकड़ियां जलाने का खास इंतजाम है, जिससे आम चूल्हे के मुकाबले बहुत कम लकड़ी लगती है और धुआं न के बराबर निकलता है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इसे चलाने वाले कारीगरों की सेहत के लिए भी बेहतर है।
मोहम्मद शेर खान पेशे से लोहे और स्टील के कारीगर हैं। उन्होंने patrika.com से बातचीत में बताया कि यह आइडिया उन्हें 20 साल पहले आया था। उन्होंने इसे लगातार अपग्रेड किया और फिर भारत सरकार से पेटेंट भी हासिल कर लिया। आज उनके ये चूल्हे केवल राजस्थान या भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूएई (UAE) और अफ्रीका जैसे देशों में भी एक्सपोर्ट हो रहे हैं।
शेर खान की इस अनोखी कारीगरी के कायल राजस्थान के बड़े-बड़े दिग्गज भी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने शेर खान की कार्यक्षमता देखकर खुले दिल से प्रशंसा की है। यह चूल्हा आज 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन राजस्थान' का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है।
मात्र 6,800 रुपये की कीमत वाला यह चूल्हा घरेलू उपयोग से ज्यादा कमर्शियल इस्तेमाल के लिए लोकप्रिय हो रहा है। चाहे राजस्थानी दाल-बाटी हो, तंदूरी चाय हो या फिर विदेशी डिश पिज्जा—यह 'विश्व गुरु चूल्हा' हर कसौटी पर खरा उतरता है। एलपीजी संकट के इस दौर में इसकी डिमांड में एकाएक भारी उछाल आया है।