
Udaipur Cricketer Karan Singh Ranawat: उदयपुर शहर के पार्क में दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने से शुरू हुआ सफर अब बड़ी उपलब्धि में बदल गया है। उदयपुर के बल्लेबाज करण सिंह राणावत (23) ने बीसीसीआई की कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में डेब्यू मैच में ही दोहरा शतक जड़कर अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया। उनकी 203 रन की पारी ने न केवल राजस्थान की टीम को मजबूती दी, बल्कि उदयपुर के क्रिकेट जगत को भी जश्न मनाने का मौका दिया। पिछले तीन साल से लगातार मेहनत के बावजूद टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे करण ने इस बार अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा।
करण सिंह सरदार सिंह राणावत के बेटे हैं। उनके पिता रेस्टोरेंट संचालक हैं। करण करीब 11 साल से क्रिकेट से जुड़े हैं। उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत पार्क में दोस्तों के साथ खेलने से हुई। दोस्त प्रखर ने उन्हें क्रिकेट एकेडमी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद करण ने वंडर क्रिकेट एकेडमी में कोच मनोज चौधरी और नरेंद्र चनाल के मार्गदर्शन में खेल की बारीकियां सीखीं। उनके बड़े भाई पुष्पेंद्र सिंह राणावत भी उनकी प्रेरणा रहे हैं।
करण के लिए यह दोहरा शतक सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि लंबे इंतजार और मेहनत का नतीजा है। वे राजस्थान की अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 टीमों के लिए खेल चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलने से वे निराश जरूर हुए, लेकिन उन्होंने अभ्यास जारी रखा। इस साल उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार पर खास ध्यान दिया, जिसका परिणाम डेब्यू मैच में ही देखने को मिला।
हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुकाबले में करण तीसरे नंबर के बाद बल्लेबाजी के लिए उतरे। उस समय राजस्थान का स्कोर दो विकेट पर 140 रन था। उन्होंने एक छोर संभालते हुए धैर्य और आक्रामकता के बीच संतुलन बनाए रखा। करण ने 292 गेंदों पर 17 चौके और तीन छक्कों की मदद से 203 रन बनाए। उनकी पारी की बदौलत राजस्थान पहली पारी में 488 रन तक पहुंचा।
करण अपनी बल्लेबाजी की तकनीक को और मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वे बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और अब उनका लक्ष्य राजस्थान की सीनियर टीम में जगह बनाकर रणजी ट्रॉफी खेलना है। इसके बाद भारतीय टीम तक पहुंचने का सपना है। डेब्यू मैच में दोहरा शतक उनके लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन करण इसे मंजिल नहीं, बल्कि अपने सफर की शुरुआत मानते हैं।