उदयपुर

विश्व मृदा दिवस पर आयोजन… घटते कृषि उत्पादन का समाधान है मृदा कार्ड: मीणा

ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा कि घटते उत्पादन का समाधान मृदा स्वास्थ्य कार्ड से ही संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नारे ‘स्वस्थ धरा-खेत हरा’ का
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Dec 06, 2017
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उदयपुर . ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा कि घटते उत्पादन का समाधान मृदा स्वास्थ्य कार्ड से ही संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नारे ‘स्वस्थ धरा-खेत हरा’ का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार काश्तकारों के खेतों की उर्वरा के प्रति जागरूक है। मृदा स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत 3 वर्षों में देश के किसान भाइयों को 14 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने समारोह में उपस्थित 30 कृषकों को मृदा हैल्थ कार्ड वितरित किये।


अनुसंधान निदेशालय व कृषि रसायन एवं मृदा विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मृदा दिवस पर मंगलवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस कार्यक्रम में विधायक मीणा ने कहा कि किसानों को खेत-मिट्टी की बीमारी तथा अन्य बातों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने जैविक खेती पर बल देते हुए कहा कि विज्ञानी खेती बढऩे से मशीनों से कार्य होने लगे हैं, लेकिन बिना पशुधन के मृदा का स्वास्थ्य कैसे ठीक रखेंगे। कृषि रसायन एवं मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्र शर्मा, ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं इससे संबंधित चल रही परियोजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। कृषि सूचना प्रौद्योगिकी केन्द्र के प्रभारी डॉ. आई.जे. माथुर, डॉ.आर. स्वामीनाथन, डॉ. सुभाष भार्गव मौजूद थे। आभार क्षेत्रीय अनुसन्धान निदेशक डॉ. शान्ति कुमार शर्मा ने जताया और संचालन डॉ. रेखा व्यास ने किया।

रसायनों व उर्वरकों से बढ़ी कृषि लागत
अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य को अच्छा रखने तथा पर्यावरण स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों व उर्वरकों के अत्यधिक व असंतुलित उपयोग से लागत बढ़ रही है। उन्होंने दो मंत्रों पर काम करने की जानकारी दी। पहला कम जमीन, कम समय व ज्यादा उपज और दूसरा प्रति बूंद अधिक फसल।

मृदा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
अनुसन्धान निदेशक डॉं. ए.के. मेहता ने कहा कि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली से जैविक खेती पर नेट वर्किंग प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है जिसमें मृदा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत, कम्पोस्ट टी तथा नाडेप कम्पोस्ट तथा बायोगैस स्लरी पर अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं।

विद्यार्थियों ने जाना माटी का मोल

उदयपुर . क्षेत्रीय मृदा परीक्षण केन्द्र की ओर से विश्व मृदा दिवस पर हुए कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डा. सज्जन सिंह राव ने मृदा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्र प्रमुख डॉ. रामसकल सिंह ने की। वैज्ञानिक डॉ. रामस्वरूप मीणा ने केन्द्रीय विद्यालय प्रतापनगर से आए अध्यापकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। वैज्ञानिक महावीर नोगिया ने पावर पोइन्ट के माध्यम से दैनिक जीवन में मृदा का महत्व एवं कृषि में मृदा संरक्षण की उपयोगिता पर प्रस्तुतिकरण दिया। कृषि मंत्रालय की ओर से हाल ही में लांच मृदा स्वास्थ्य कार्ड मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी। डॉ. प्रवास चन्द्र मोहराना ने विभिन्न उपकरणों से पीएच, ईसी, मृदा में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी। डॉ. बी.एल. टेलर ने जीआईएस प्रयोगशाला में सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली से मृदा मानचित्रण के लिए इमेजरीज एवं मृदा वर्गीकरण के बारे में समझाया।

प्रश्नोत्तरी में तुषार व गौरव अव्वल
विद्यार्थियों के लिए हुई प्रश्नोत्तरी में तुषार आमेटा एवं गौरव योगी प्रथम, टीष्या मोजू द्वितीय एवं सार्थक विजय तृतीय रहे। विद्यार्थियों को पुस्तकालय एवं मृदा संग्रहालय का अवलोकन करवाया गया। सभी विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर जानकारी प्राप्त की एवं प्रश्न भी पूछे।

Published on:
06 Dec 2017 02:06 am