आद्यशंकराचार्य की प्रतिमा के लिए जन-जागरण के निमित्त मध्यप्रदेश के प्रमुख चार स्थानों से निकाली जाने वाली एकात्म यात्रा का शंखनाद उज्जैन से हुआ।
उज्जैन. आद्यशंकराचार्य की प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण तथा जन-जागरण के निमित्त मध्यप्रदेश के प्रमुख चार स्थानों से निकाली जाने वाली एकात्म यात्रा का शंखनाद मंगलवार को उज्जैन से हुआ। एकात्म यात्रा भव्यतम स्वरूप में निर्धारित स्थल चारधाम से भ्रमण पर रवाना हुई। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान एवं उनकी पत्नी साधनासिंह ने धर्म-ध्वजा थामकर हरसिद्धि मंदिर तक साथ चले। उज्जैन की धर्मपरायण जनता ने घरों से निकलकर यात्रा का स्वागत किया। शहर में अनेक स्थानों पर मंच बनाए गए। नागरिकों ने पुष्पवर्षा की। यात्रा में सन्त समाज, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक, स्त्री-पुरूष, बच्चे बड़ी संख्या में साथ चल रहे थे। आगे-आगे घुड़सवार पुलिस बल चल रहा था।
मंच से बोले सीएम
भव्य मंच से सीएम चौहान ने कहा कि दुनिया में जो अशांति फैली हुई है, उसे भारतीय संस्कृति शंकराचार्य के एक वेदांत से ही दूर की जा सकती है। देश को एकजुट अगर किसी ने किया है तो शंकरचार्य जी ने किया है। यह यात्रा लोगों को पर्यावरण, वेदांत और महिलाओं की सुरक्षा का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि इस देश में जहां महिलाओं की पूजा होती है, वहां कुछ ऐसे राक्षस भी हैं जो दुराचार करते हैं। मैंने ऐसे लोगों को फांसी पर लटकाने की व्यवस्था की है। पीपलीनाक क्षेत्र में इमली चौराहा को आद्य शंकराचार्य का नाम देने और वहां मूर्ति स्थापना की घोषणा सीएम ने की है।
संत बोले...
कार्यक्रम के आरंभ बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इसी दौरान मंच पर विराजमान संतों ने कहा स्मार्ट सिटी से जरूरी है स्मार्ट जिंदगी बनाएं।
कहां-कहां से गुजरी यात्रा
एकात्म यात्रा उज्जैन में चारधाम मन्दिर से आरंभ होकर हरसिद्धि चौराहा, बड़ा गणेश मन्दिर, महाकाल मन्दिर, चौबीस खंबा माता मन्दिर, पटनी बाजार, गोपाल मन्दिर, छत्रीचौक, सतीगेट, कण्ठाल चौराहा, नईसड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुण्डा माता चौराहा से आगर रोड होती हुई निकली। यात्रा का अगला गंतव्य तराना की ओर था। इस दौरान यात्रा में शामिल महिलाएं अपने सिर पर कलश थामकर चल रही थीं। कई महिलाओं के समूह बैण्ड की धुन पर नृत्य करते हुए वातावरण में भक्तिरस घोल रहे थे। नर-नारियों का समूह जयघोष करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा था। सन्तों एवं साधुओं का समूह जयकारे के साथ यात्रा में नेतृत्वकर्ता के रूप में सम्मिलित रहा।
यात्रा में शामिल था विशालकाय रथ
यात्रा में सम्मिलित विशालकाय रथ, आद्यशंकराचार्य के वृहताकार चित्र तथा उनसे जुड़े प्रतीकों से युक्त था। शंकराचार्य के चित्र पर नागरिकों द्वारा स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा की गई। इसके पीछे एक अन्य रथ में छोटा बालक शंकराचार्य का स्वरूप धारण किए हुए था। अन्य दो बड़े वाहन भी यात्रा में सम्मिलित थे। यात्रा के दौरान पुलिस तथा प्रशासन द्वारा माकूल इंतजाम किए गए। फायर ब्रिगेड वाहन, एम्बुलेंस तथा विद्युत वितरण कंपनी के वाहन भी आवश्यक साजो-सामान के साथ चल रहे थे।
एकात्म यात्रा का उज्जैन जिले का रूट
एकात्म यात्रा के रूट में उज्जैन से प्रारम्भ होकर नजरपुर, मालीखेड़ी, बिछड़ौद होते हुए शाम को तराना पहुंचना तथा रात्रि विश्राम। इसके पश्चात 20 दिसम्बर को तराना से इटावा, छड़ावद, तिलावद, नान्देड़, माकड़ोन, रूपाखेड़ी, घोंसला, खेड़ा खजूरिया होते हुए दोपहर 2 बजे महिदपुर पहुंचेगी। महिदपुर से रवाना होकर डेलची, महिदपुर रोड, रूपेटा होते हुए यात्रा सायं 5 बजे नागदा पहुंचेगी। नागदा से चौकी जुनार्दा, उमरना, उमरनी, बुरानाबाद होते हुए यात्रा शाम 7 बजे खाचरौद पहुंचेगी। अगले दिन 21 दिसम्बर को खाचरौद से मड़ावदा, कमठाना, भाटपचलाना, कमेड़, रूनिजा होते हुए यात्रा दोपहर 12 बजे बडऩगर पहुंचेगी। बडऩगर से मौलाना, खरसोदखुर्द, धुरैरी, सरसाना, इंगोरिया, दंगवाड़ा, बलेड़ी, नरसिंगा होते हुए यात्रा दोपहर 3 बजे इंगोरिया पहुंचेगी। इंगोरिया से कड़ोदा, पितावली, छड़ोदा, तलावती, रलायता, बछोड़ा, गिरोता, ओसारा, पाड़ल्या होते हुए यात्रा सायं 6 बजे इन्दौर जिले के गौतमपुरा पहुंचेगी। यह यात्रा इन्दौर, देवास, राजगढ़, गुना, अशोक नगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया होते हुए ओंकारेश्वर पहुंचेगी। यह यात्रा 12 जिलों में होकर लगभग 2175 किलो मीटर की दूरी तय करेगी।