Mahakal Darshan : महाकाल दर्शन के लिए आई बीमार महिला की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई। उज्जैन पहुंचने के बाद नासिक से आई बीमार महिला का निधन। अपरिचित शहर में बेसहारा हुए बुजुर्ग पति की समाजसेवी ने की मदद। पूरे सम्मान के साथ किया गया महिला का अंतिम संस्कार।
Woman Passes Away at Lord Shrine : भगवान महाकाल के दर्शन की अंतिम इच्छा लेकर महाराष्ट्र के नासिक से मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन आई एक बीमार महिला की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी और आखिरकार बाबा महाकाल के दर्शन से पहले ही उसका का निधन हो गया। पत्नी की मौत के बाद अपरिचित शहर में पूरी तरह अकेले पड़ चुके बुजुर्ग पति की मदद के लिए लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले समाजसेवी अनिल डागर आगे आए और उन्होंने पूरे सम्मान और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ महिला का अंतिम संस्कार कराया।
जानकारी के अनुसार, नासिक में रहने वाली 50 वर्षीय महिला सीमा पति भेरूलाल लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनकी हालत ये थी कि, वो चलने - फिरने तक से असमर्थ थीं। उन्होंने जीवन में अंतिम बार भगवान महाकाल के दर्शन करने की इच्छा जताई थी। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए बुजुर्ग भेरूलाल अपनी बीमार पत्नी को लेकर बाबा महाकाल के शहर उज्जैन तक पहुंच गए थे, लेकिन भगवान के दर तक पहुंचने के बाद भी दर्शन करने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। सीमा ने महाकाल के दर्शन से पहले ही दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि, दंपति अकेले ही महाकाल के दर्शन करने आए हुए थे। उनके साथ कोई अन्य परिजन मौजूद नहीं था। पत्नी की अचानक मौत के बाद बुजुर्ग पति पूरी तरह असहाय हो गए। अनजान शहर में वो अपनी पत्नी का शव लेकर कहां जाएं, उन्हें समझ नहीं आ रहा था। ऐसे में स्थानीय लोगों ने उनकी पीड़ा को समझते हुए उन्हें शहर में रहने वाले एक समाजसेवी अनिल डागर का पता बताया और किसी तरह वो समाज सेवी के पास पहुंच सके।
जैसे - तैसे बुजुर्ग अपनी पत्नी का शव लेकर समाज सेवी अनिल डागर के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई। स्थिति को समझते ही अनिल डागर ने तत्काल अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभालने के निर्णय लिया। इसके बाद डागर ने न सिर्फ श्मशान घाट पर लकड़ियों की व्यवस्था करवाई बल्कि पूरे विधि - विधान से महिला का दाह संस्कार भी कराया।
यही नहीं, समाजसेवी डागर ने बुजुर्ग व्यक्ति का सहारा बनते हुए उनकी पत्नी की चिता की परिक्रमा समेत सभी अंतिम क्रियाएं सम्मान पूर्वक हिंदू विधी विधान से संपन्न कराईं। फिलहाल डागर की इस संवेदनशील पहल की स्थानीय लोगों द्वारा अब खासा सराहना की जा रही है।