2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘सिया ने जरा सा भी धैर्य नहीं रखा…’, मम्मी-पापा भी जिम्मेदार, उज्जैन में बोलीं महिलाएं

Ketan Murder Case Analysis: पूमे के केतन हत्याकांड को लेकर शहर के कई वर्गों से जुड़ी महिलाओं से पत्रिका ने बताचीत की। जानिए उन्होंने क्या कहा...
3 min read
Google source verification
Ketan Murder Case: हत्याकांड को लेकर महिलाओं से की गई बात (Photo Source - Patrika)

Ketan Murder Case: हत्याकांड को लेकर महिलाओं से की गई बात (Photo Source - Patrika)

Ketan Murder Case: एमपी के उज्जैन शहर में हाल ही में पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड को लेकर समाज के प्रबुद्ध वर्ग और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं में गहरा आक्रोश और चिंता देखी जा रही है। इस दुखद घटना और बदलते सामाजिक ताने-बाने को लेकर शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नारियों ने अपनी बेबाक राय रखी है। सभी ने एक सुर में कहा है कि इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए जहां सख्त कानून की जरूरत है, वहीं माता-पिता को भी अपनी बेटियों के साथ संवाद बढ़ाना होगा। पत्रिका ने इस चर्चित मामले को लेकर विभिन्न वर्ग से जुड़ी महिलाओं से चर्चा की।

समाज में इन घटनाओं से मन कचोटता है: डॉ. जैन

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. ज्योति जैन ने कहा कि समाज में हो रही इस तरह की घटनाओं से मन कचोटता है। आरोपित सिया ने जरा सा भी धैर्य नहीं रखा। आज जब अपराध की दुनिया में इस तरह की लड़कियों के नाम सुनाई देते हैं, तो मन व्यथित हो उठता है। यह घटना सिद्ध करती है कि महिलाओं की कोमलता कहां चली गई, परिवार और घर के साथ-साथ मर्यादा को भी कहीं ताख पर रख दिया है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत ही घातक सिद्ध होगा।

आपसी विश्वास और सम्मान टिका होना चाहिए- पूजा

जब बच्चे के मन से इस बात का डर निकल जाता है कि गलती होने पर माता-पिता क्या कहेंगे या कैसे रिएक्ट करेंगे, तब वह बाहर किसी गलत संगति या सलाह का शिकार होने के बजाय सीधे अपने घर पर बात करता है। आजकल की युवतियां अपनी इच्छाएं, करियर, या अन्य सपनों को जब बिखरता देखती है, तो किसी मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो जाती है। यह दोहरापन बहुत खतरनाक होता है, जिसका परिणाम हमें सोनम और सिया जैसी युवतियों में नजर आता है। समाज के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है।

सिया ही नहीं, दबाव बनाने वाले माता-पिता भी जिम्मेदारः विनी

सामाजिक कार्यकर्ता विनी अग्रवाल ने इस मामले के दूसरे पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा, इस मामले में केवल सिया को दोषी ठहरा देना काफी नहीं है। यदि वास्तव में उस पर कम उम्र में विवाह का दबाव डाला गया और उसकी इच्छाओं व सपनों को समझने की कोशिश नहीं की गई, तो यह माता-पिता की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सभी माता-पिता से निवेदन है कि बच्चों के साथ विश्वास और मित्रता का ऐसा रिश्ता बनाएं ताकि वे बिना किसी डर के अपने मन की बात कह सकें।

सुरक्षित माहौल और अनुशासन होना जरूरी- नरवरिया

जब माता-पिता एक सुरक्षित माहौल देते हैं, तो बच्चे के लिए एक सुरक्षा कवच बन जाता है। माता-पिता की सजगता से किसी भी अनहोनी या गलत कदम को सही समय पर रोका जा सकता है। लड़कियों के बहकते कदम कहीं न कहीं घर वालों को पता चल जाते है, लेकिन वे अक्सर उन्हें अनदेखा करते है, यह ठीक नहीं। समय रहते बच्चों को सुरक्षित माहौल दें, खुलकर जीने का हौसला देता है। जब ये दोनों चीजें साथ मिलती है, तो युवा पीढ़ी किसी मानसिक दबाव का सामना करने लिए पूरी तरह सक्षम बनती है।

मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियां असत्य सिद्ध हो रही हैं: डॉ. सरोज

कौटिल्य एकेडमी की डॉ. सरोज यादव ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, मेरे देश में आज की नारी मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध पंक्तियों (अबला जीवन हाय…) को असत्य सिद्ध कर रही है। भारतीय नारी जो सरल, सहज और ममतामयी मानी जाती थी, आज उस पर हत्यारिन और कोख उजाड़ने वाली उपलब्धियां लग रही है। राजा रधुवंशी हत्याकांड की पुनरावृत्ति सिया ने केतन हत्याकांड करके कर डाली। ऐसी घटनाओं के लिए कहीं न कहीं लड़कियों के माता-पिता भी जिम्मेदार है।