Mahakal Ujjain Bhama Arti: भोलेनाथ जितने सहज और सरल हैं, उतने ही रहस्यमयी भी हैं। पूरे भारत में अपने रहस्यमय स्वरूपों में भगवान शिव के सबसे रहस्यमयी स्वरूपों में से एक है महाकाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में में शिव का यह स्वरूप भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है...इस स्वरूप के दर्शन के लिए महिलाओं समेत पुरुषों को भी नियमों का पालन करना होता है...

Mahakaleshwar Darshan: भोलेनाथ जितने सहज और सरल हैं, उतने ही रहस्यमयी भी हैं। पूरे भारत में अपने रहस्यमय स्वरूपों में भगवान शिव के सबसे रहस्यमयी स्वरूपों में से एक है महाकाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में में शिव का यह स्वरूप भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर दिन महाकाल का शृंगार किया जाता है और हर दिन 5 आरती की जाती हैं।
महाकाल मंदिर उज्जैन (Mahakaleshwar Temple Ujjain) में बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन एक दिन नहीं या किसी विशेष दिन नहीं बल्कि हमेशा ही रहती है।
वहीं भस्म आरती (Bhasm Aarti) में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। भोर में 4 बजे की जाने वाली यह आरती बेहद खास मानी जाती है, इसीलिए हर कोई चाहता है कि वे यदि महाकाल के दर्शन करने आ रहा है, तो भस्म आरती में जरूर शामिल हो। लेकिन आपको बता दें कि इस आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए कुछ खास नियम हैं...जिन्हें फॉलो करना अनिवार्य है..
भस्म आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए एक ड्रेस कोड (Dress Code) तय है। यदि इस ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता, तो भस्म आरती में शामिल होने की परमिशन भी नहीं दी जाती।
भस्म आरती दर्शन (Bhasm Aarti Darshan) करने के लिए पुरुषों को कुछ नियमों का पालन करना होता है उन्हें इस आरती को देखने के लिए केवल धोती पहननी होती है। धोती साफ और सूती होनी चाहिए।
ड्रेस कोड ( Bhasm Aarti Dress code) के साथ ही उन्हें एक खास नियम का पालन करना होता है। महिलाओं को आरती में शामिल होने के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। वहीं जब शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है, तो उस समय उन्हें घूंघट करने को कहा जाता है। यानी महिलाएं भगवान शिव के इस स्वरूप के दर्शन घूंघट की आड़ से ही कर सकती हैं।
दरअसल माना जाता है कि उस भस्म आरती के समय भगवान शिव (Lord Shiva) अपने निराकार रूप में होते हैं और महिलाओं को भगवान शिव के इस स्वरूप के प्रत्यक्ष दर्शन करने की अनुमति नहीं होती।
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि प्राचीन काल में दूषण नाम के एक राक्षस की वजह से पूरी उज्जैन नगरी में हाहाकार मचा था। नगरवासियों को इस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उसका वध कर दिया। फिर गांव वाले भोले बाबा से यहीं बस जाने का आग्रह करने लगे।
तब से भगवान शिव महाकाल के रूप में वहां बस गए। शिव ने दूषण को भस्म किया और फिर उसकी राख यानि भस्म से अपना शृंगार किया। इसी वजह से इस मंदिर का नाम महाकालेश्वर रख दिया गया और शिवलिंग की भस्म से आरती की जाने लगी।
भोर में 4 बजे होने वाली आरती को भस्म आरती इसलिए कहा जाता है क्योंकि महाकाल बाबा की पहली आरती के समय बाबा महाकाल का श्मशान में जलने वाली सुबह की पहली चिता की भस्म से शृंगार किया जाता था।
इस भस्म से बाब महाकाल का शृंगार हो इसके लिए भी लोग पहले से ही रजिस्ट्रेशन कराते हैं और मृत्यु के बाद उनकी भस्म से भगवान शिव का शृंगार किया जाता था