Mp weather: फरवरी के आगामी दिनों मे हिमालयी क्षेत्र में नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में रात के तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आ सकती है।
Mp weather: मौसम का मिजाज इन दिनों हर किसी को अचंभित कर रहा है। फरवरी के दूसरे सप्ताह में ही पारा 30-31 डिग्री हो जाना, इस बात का संकेत है कि प्रकृति के चक्र में कुछ बड़े बदलाव हो रहे हैं। वहीं इस बार सर्दी भी कम पड़ी, सर्दी कम पडऩे और समय से पहले गर्मी का अहसास होने से लोगों को घबराहट, चक्कर आना और अन्य कई तरह की बीमारियों का असर हो रहा है। इधर, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने से गर्मी का अहसास हो रहा है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी फिर से होती है, तो सर्दी एक बार फिर से लौट सकती है।
जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. आरपी गुप्त ने बताया कि इस बार ठंड कम पड़ी है। कड़ाके की ठंड न पडऩे के पीछे तीन सबसे बड़े वैज्ञानिक कारण हैं। इनमें मुख्य रूप से कमजोर पश्चिमी विक्षोभ रहा है। उत्तर भारत में ठंड तब आती है, जब पहाड़ों पर भारी बर्फबारी होती है। इस साल दिसंबर और जनवरी में मजबूत पश्चिमी विक्षोभ नहीं आए, जिससे पहाड़ों पर सूखी ठंड तो रही, लेकिन मैदानी इलाकों तक पहुंचने वाली बर्फीली हवाएं नहीं चलीं।
दूसरा कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के कारण इस साल वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक रहा है। इसकी वजह से भारत में भी शीत लहर के दिनों की संख्या काफी कम रही। तीसरी वजह है बादलों की कमी। इसकी वजह से दिन में सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे 'सोलर रेडिएशन' बढ़ गया है और दिन गर्म हो रहे हैं।
हालांकि, फरवरी के आगामी दिनों मे हिमालयी क्षेत्र में नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में रात के तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आ सकती है। इससे सुबह और रात के वक्त हल्की गुलाबी ठंड बनी रहेगी, लेकिन दिन गर्म ही रहेंगे। तकनीकी रूप से गर्मी ने अपनी दस्तक दे दी है। आने वाले दिनों में पारा 32 से 34 डिग्री के बीच रहने की संभावना है।
सभी के मन में यही सवाल हैं कि अभी तो सर्दी के दिन माने जाते हैं, लेकिन तापमान 31 डिग्री तक पहुंच गया है। इसका कारण हवाओं की दिशा में बदलाव है। वर्तमान में उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएं थम गई हैं और राजस्थान व गुजरात की ओर से आने वाली गर्म और शुष्क हवाओं ने मध्य प्रदेश का रुख कर लिया है। इसी वजह से उज्जैन और आसपास के इलाकों में मार्च जैसी गर्मी महसूस हो रही है। इस बार हाड़ कंपाने वाली ठंड न के बराबर रही है।