लोककला एवं संस्कृति का यह महोत्सव अलग-अलग स्थानों व समयानुसार 7 अक्टूबर तक चलेगा
उज्जैन. लोक कलाओं, संस्कृति के पोषण एवं संवर्धन के लिए पिछले 12 वर्षों से अखिल भारतीय संजा लोकोत्सव का आयोजन प्रतिकल्पा संस्था द्वारा किया जा रहा है। रविवार शाम 7 बजे शहीद पार्क पर प्रथम संध्या आयोजित हुई। इस वर्ष की प्रथम संध्या में मालवा की सौंधी महक के बीच संजा आरती और लोक नाट्य माच का आयोजन हुआ। मालवा की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुके इस संजा महोत्सव में दर्शकों ने देर रात तक कला के संगम में गोते लगाए। लोक नाट्य माच पर थिरकते कदमों ने वो गुजरा जमाना याद दिला दिया, जब गांवों में दशहरे से पहले 10 दिनों तक मशाल के उजालों में नौटंकियां हुआ करती थीं।
राजा भर्तृहरि का नाट्य मंचन
ब्रह्माणी माच मंडल ग्राम चिकली के कलाकारों द्वारा राजा भर्तृहरि नाट्य का मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में बड़े से काष्ठ बोर्ड पर रंगबिरंगी बनाई गई संजा की आरती ढोल-मंजीरों के साथ अतिथियों और उपस्थित दर्शकों द्वारा मालवी भाषा में उतारी गई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का स्वागत-सम्मान हुआ। प्रतिकल्पा शिखर सम्मान हीरालाल परमार व कैलाश बारोठ (काका) को दिया गया। मुख्य अतिथि डॉ. मोहन यादव, अध्यक्षता डॉ. मोहन गुप्त ने की तथा विशेष अतिथि डॉ. शिव चौरसिया थे। कार्यक्रम में जापान से विशेष मेहमान भी यहां उपस्थित थीं, जिनका भी सम्मान किया गया। विक्रम विवि के कुलानुशासक शैलेंद्र शर्मा ने उपस्थित अतिथियों एवं संस्था का परिचय दिया। संचालन सुदर्शन आयाचित ने किया।
कब, कहां होंगे आयोजन
संस्था निदेशक डॉ. पल्लवी किशन ने बताया कि 2 अक्टूबर को कला प्रशिक्षण प्रदर्शनी सुबह 10 से 1 बजे गुरुगोकुल कला मंडल प्रतिकल्पा कार्यालय में होगा। 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से संजा एवं मांडना स्पर्धा यंग होराल्ड स्कूल गढ़कालिका। 4 अक्टूबर को सामूहिक व एकल लोकनृत्य दोपहर 12 बजे से कालिदास अकादमी में। 5 अक्टूबर को ग्राम माकड़ोन में प्रतियोगिता व कला प्रदर्शनी, 6 व 7 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी कालिदास संकुल में होगी।
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