दावेदारी मजबूत करने के लिए किसी ने हवा में गुब्बारे उढ़ाए तो किसी ने चलाया प्रचार रथ, सोाशल मीडिया का भी कर रहे भरपूर उपयोग
उज्जैन. विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका है लेकिन दोनों ही राजनीतिक दलों में टिकट की दौड़ खत्म नहीं हुई है। राजनीतिक दलों द्वारा अभी अपने अधिक्रत प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए हैं, इससे पहले ही कुछ दावेदारों ने चुनावी मैदान इस तरह तैयारी शुरू कर दी है जैसे प्रत्याशी चुनाव कैंपेन में करते हैं। कोई प्रचार के गुब्बारे उढ़ा रहा है तो किसी ने प्रचार रथ ही शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर तो अपनी योग्यता-क्षमता दिखाने के लिए बाढ़-सी आ गई है।
आखिरी दाव खेल रहे
कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही पार्टियों में टिकट वितरण को लेकर मंथन का दौर जारी है। इधर दावेदार भी वरिष्ठ नेताओं को प्रभावित करने के लिए आखिरी दाव खेल रहे हैं वहीं इनमें से कुछ दोवदारी मजबूत करने के लिए प्रत्याशी की तरह प्रचार कर रहे हैं। इस प्रचार में जहां अपने चेहरे को जनता के सामने ला रहे हैं वहीं क्षेत्र के सिटिंग एमएलए को घेरने का प्रयास भी कर रहे हैं। यही नहीं कुछ ने तो जनसेवा तक शुरू कर रखी है। कुछ उम्मीदवारों के प्रचार का तरीका तो इस तरह है कि कई लोग उन्हें संबंधित पार्टी का प्रत्याशी ही समझ बैठे हैं। पार्टी चुनाव में किसी मौका देगी फिलहाल यह तो तय नहीं है, लेकिन इन दावेदारों ने टिकट की उम्मीद में ही खर्च करने में कमी नहीं छोड़ी है।
कोई खुलकर तो कोई इशारों में कर रहा प्रचार
पार्टियों में टिकट से पहले दावेदारों के चुनाव प्रचार के तरीके अलग-अलग हैं। कांग्रेस में जहां कुछ दावेदार खुलकर प्रचार कर रहे हैं वहीं भाजपा के दावेदार सोशल मीडिया का सहारा लेकर इशारो-इशारों में दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
एक काम, फायदे कई
- अधिक्रत अभ्यर्थी बनने से पहले तक किए प्रचार का खर्च चुनावी खर्च में नहीं जुड़ेगा। अभ्यर्थी बनने के बाद नए सीरे से आवेदन लेकर प्रचार शुरू करेंगे तो सिर्फ उसी समय तक का खर्च जोड़ा जाएगा।
- जनता के बीच पहले से ही पेठ बनाने में आसानी, प्रचार के लिए अधिक समय मिल गया।
- टिकट से पहले प्रचार करने से जनता के बीच आत्मविश्वास झलकता है, प्रतिद्वंदी संशय में पड़ते हैं।
टिकट से पहले एेसे हो रहा प्रचार
बेलून व ई-रिक्शा- पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता विवेक यादव ने उज्जैन उत्तर से मंत्री पारस जैन के सामने चुनाव लड़ा था। इस बार फिर वह दावेदारी कर रहे हैं। आचार संहिता लगने से पूर्व ही यादव ने विधानसभा क्षेत्र में तीन बेलून लगा दिए थे। इसके अलावा दो ई-रिक्शा भी चल रहे हैं। आचार संहिता लागू होने से पूर्व यादव ने दिव्यांग, वृद्ध व अन्य जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क घर पहुंच सेवा शुरू कर रखी थी। अब इन ई-रिक्शा से वे अपना प्रचार करने के साथ मंत्री जैन से उनके कार्यकाल का हिसाब मांग रहे हैं।
चलाया प्रचार वाहन
उज्जैन दक्षिण से कांग्रेस से पिछला चुनाव लड़ चुके जयसिंह दरबार इस बार भी दावेदारी कर रहे हैं। टिकट मिलने से पहले ही उन्होंने दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में प्रचार वाहन चलना शुरू कर दिया है। इसके जरिए वह स्वयं को जनता के बीच का नेता व सेवक बता रहे हैं।
इंडेक्स से बता रहे जीत का सफर
सोशल मीडिया पर मंत्री व उज्जैन उत्तर के विधायक पारस जैन का पोस्टर प्रसारित हो रहा है। इसमें इंडेक्स के जरिए जैन की बढ़ती लोकप्रियता बताने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें उनके पूर्व के तीन-चार चुनाव और प्रत्यके चुनाव में बढ़ते जीत के अंतर को ग्राफ के रूप में दिखाया जा रहा है। इसके जरिए अप्रत्य रूप से यही दावा करने का प्रयास किया जा रहा है कि इस बार टिकट मिला तो और अधिक मतों से जीत होगी।
याद दिला रहे वादा
उज्जैन उत्तर से ही भाजपा नेता व नगर निगम अध्यक्ष सोनू गेहलोत को लेकर कई युवा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। इसमें कोई उन्हें उत्तर की पुकार बोल रहा है तो कोई युवाओं की पसंद बता रहा है। यहां तक कि कुछ पोस्ट में मंत्री जैन को अगला चुनाव नहीं लडऩे का वादा याद दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
वीडियो और गाने से प्रचार
कांग्रेस पूर्व शहर अध्यक्ष अनंतनारायण मीणा, माया त्रिवेदी, राजेंद्र वशिष्ठ सहित कई दावेदार भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। कोई गीत के साथ अपना वीडियो चलवा रहा है तो किसी ने अपने संघर्ष और उपलब्धियों का गुणगान किया है।