पुलिस जांच में सामने आया कि ब्रेक फेल, स्टेयरिंग खराब, तेज रफ्तार और ड्राइवर की हायतौबा से त्रिवेणी ब्रिज पर लटकी थी बस
उज्जैन. इंदौर फोरलेन पर चार दिन पहले त्रिवेणी ब्रिज पर लटकी ज्वालेश्वरी ट्रेवल्स की बस की पुलिस जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। घटना के वक्त गाड़ी तेज रफ्तार में दौड़ रही थी और क्षमता से अधिक सवारी बैठा रखी थी। वहीं गाड़ी का ब्रेक फेल निकला है और उसके स्टेयरिंग भी खराब थी। बस का फिटनेस भी मापदंड के मुताबिक नहीं था। यानी बस मालिक और ड्राइवर एक तरह से खटाला बस को इंदौर रोड पर दौड़ा रहे थे और क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। मामले में पुलिस अब बस की रजिस्टर्ड मालिक कांग्रेस नेता की पत्नी के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
इंदौर फोरलेन पर 18 अगस्त की अपराह्न 4.15 बजे ज्वालेश्वरी ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी 13 पी 2070 त्रिवेणी ब्रिज की रेलिंग से टकरा कर ब्रिज से लटक गई। बस का एक पहिया ब्रिज बाहर निकल गया था। घटना के वक्त बस में 50 से ज्यादा यात्री बैठे थे। उस समय गनीमत रही कि रेलिंग बस के कारण अटक गई लेकिन बड़ा हादसा हो जाता है। वहीं घटना के बाद पुलिस ने अब बस की जांच करवाई तो गड़बड़ी सामने आई है। बस का ब्रेक फेल होना पाया गया है, वहीं इसका स्टेयरिंग भी खराब निकला है। बस के फिटनेस भी ठीक नहीं पाई गई। बस की इंजन, वायरिंग व अन्य मशनरी भी सही नहीं थी। इसके अलावा यह भी तथ्य सामने आया कि घटना के वक्त बस तेज रफ्तार में दौड़ रही थी।
यात्रियों ने बस की गति को लेकर आपत्ति भी जताई थी। लेकिन ड्राइवर पहुंचने की जल्दबाजी दिखा रहा था। लिहाजा जैसे ही वह त्रिवेणी ब्रिज पर पहुंचा तो उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रेलिंग से जा टकराया। पुलिस का मानना है कि बस की खराब कंडीशन के लिए बस मालिक भी जिम्मेदार है। ऐसे में पूरी जांच के बाद मालिक पर कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि बस कांग्रेस नेता रवि शुक्ला की पत्नी अंजना शुक्ला के नाम रजिस्टर्ड है।
राजनीति दबाव में दौड़ रही खटारा बसें
इंदौर-उज्जैन रोड पर करीब १५० से ज्यादा बसें दिनभर दौड़ रही है। इन बसों के अधिकांश मालिक राजनीतिक रसूखवाले हैं।
इसी के चलते इंदौर, उज्जैन सहित अन्य मार्गों पर चलने वाली बसों की स्थिति बेहतर नहीं है। चूंकि राजनीतिक दबाव है इसके लिए आरटीओ द्वारा बसों की फिटनेस की जांच भी सिर्फ खानापूर्ति भर रहती है। बस ड्राइवर ही नाम नहीं छापने की शर्त पर बता रहे हैं कि बड़े बस ऑपरेटरों के पास १० से २० बसें है। कभी कार्रवाई होती भी है तो एक बस की जांच कर बाकी सभी को छोड़ देते हैं। वहीं मालिक का दबाव रहता है मजबूरन खटारा बस लेकर ही जाना पड़ता है। बता दें कि ज्वालेश्वरी ट्रेवल्स की ही करीब ११ बसें इस इंदौर- उज्जैन रोड़ पर चल रही है। इसके मालिक रवि शुक्ला खुद को सीएम कमलनाथ के खास बताते हैं।
पुलिस अफसर का ट्रांसफर करवाया, इसलिए कार्रवाई में उलझी पुलिस
इंदौर रोड पर बस के त्रिवेणी ब्रिज की रेलिंग से टकराने और उसे छोड़ देने के पीछे पुलिस महकमे में एक बड़े अफसर की भूमिका की चर्चा नानाखेड़ा थाने में है। पुलिसकर्मी ही बता रहे है शहर में नए आए इस अफसर की पदस्थी ही बस ऑपरेटर ने करवाई है। जैसे ही दुर्घटना की जानकारी आई तो बस पर कार्रवाई नहीं करने को पुलिस अधिकारी का दबाव आ गया। इसी के चलते पुलिस ने आनन-फानन में क्रेन लेकर पहुंच गई, बस को निकलवाया और उसे जब्त कर थाना नहीं लाते हुए छोड़ दिया गया। इस पुलिस अफसर का नाम हाल ही शहर में हुए एक विवाद में सामने आया था।
इनका कहना
बस की जांच में ब्रेक फेल होना व स्टेयरिंग खराब होना निकला है। फिटनेस के मापदंड पर भी बस ठीक नहीं निकली है। अभी जांच कर रहे हैं।
- रोहित कुमार, जांच अधिकारी, नानाखेड़ा थाना
बस की जांच में सामने आया है कि बस तेज रफ्तार से चल रही थी। यत्रियों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। ड्राइवर की जल्दबाजी भी दिखी। वैसे मेडिकल परीक्षण में ड्राइवर ठीक निकला है।
- सतनामसिंह, टीआई, नानाखेड़ा