उज्जैन

MP में सियासी भूचाल, उज्जैन महापौर चुनाव पर कोर्ट का बड़ा फैसला, अब होगी सुनवाई

MP News: उज्जैन महापौर चुनाव 2022 अब कानूनी घेरे में है। अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना है, जिससे महापौर की कुर्सी पर सियासी संकट गहराने लगा है।

2 min read
Feb 28, 2026
ujjain mayor election 2022 controversy court accepted petition (फोटो- Patrika.com)

Ujjain Mayor Election 2022: उज्जैन नगर निगम महापौर चुनाव 2022 से जुड़े बहुचर्चित विवाद में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। प्रधान जिला न्यायाधीश पीसी गुप्ता की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए महापौर, निर्दलीय प्रत्याशी और जिला निर्वाचन अधिकारी की आपत्तियां खारिज कर दी है। अब चुनाव याचिका पर विस्तृत सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज और बढ़ने की संभावना है। 19 फरवरी को पारित आदेश में न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सभी आवश्यक तथ्यों का विस्तृत उल्लेख शपथपत्र के साथ किया है। प्रतिवादियों की ओर से लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं है। अदालत ने साफ किया कि बिना साक्ष्य यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि याचिका असत्य या निराधार है। इसी आधार पर आवेदन निरस्त कर दिए गए। (MP News)

ये भी पढ़ें

भोपाल मेट्रो पर चलेंगी कोचिंग और कंप्यूटर क्लास, 8 स्टेशनों पर खुलेंगी 37 दुकानें

याचिकाकर्ता ने 923 मतों से हार, परिणाम पर सवाल

सीनियर हाईकोर्ट एडवोकेट रसिक सुगंधी ने बताया कि 17 जुलाई 2022 को हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार ने परिणाम को चुनौती दी है। घोषित नतीजों के अनुसार परमार को 1,33,317 और भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल को 1,34,240 मत मिले थे। इस प्रकार 923 मतों से पराजय घोषित की गई। परमार ने आरोप लगाया कि मतगणना के बाद घोषित आंकड़े असत्य थे और उन्होंने तत्काल लिखित रूप से पुनर्मतगणना की मांग की थी, जिसे मान्य नहीं किया गया।

60 वैध मत अस्वीकृत करने का गंभीर आरोप

याचिका के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने प्रारंभ में आश्वासन दिया कि यदि आंकड़े गलत पाए गए तो रिकाउंटिंग होगी, लेकिन बाद में मांग ठुकरा दी गई। प्रारूप 21-क में गलत प्रविष्टियां दर्ज करने का भी आरोप है। सबसे गंभीर आरोप मतदान केंद्र क्रमांक 274 को लेकर है। दावा है कि वहां परमार को 277 मत मिले थे, लेकिन रिकॉर्ड में 217 मत दर्शाए गए और 60 वैध मत अनुचित रूप से अस्वीकृत कर दिए गए।

याचिका खारिज कराने की कोशिश कोर्ट ने नकारी

महापौर मुकेश टटवाल, निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान और जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर ने आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत आवेदन देकर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि याचिका में वाद कारण का अभाव है, तथ्य छिपाए गए हैं और सत्यापन विधि अनुसार नहीं है। अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि मामले की सच्चाई साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी। (MP News)

ये भी पढ़ें

MP में BJP विधायक ने बेटे-बेटी के नाम कराई आदिवासी की जमीन, कलेक्टर पर उठे सवाल

Published on:
28 Feb 2026 03:51 am
Also Read
View All

अगली खबर