केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर को लागू किए एक साल पूरा हो गया...
उन्नाव. और जीएसटी का 1 साल पूरा हो गया। इस बीच तमाम विरोध के स्वर भी उभरे। व्यापारी संगठन द्वारा आंदोलन किया गया। जीएसटी के बाद लोहा और कृषि यंत्रों के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिसके कारण किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही व्यापारियों का एक पक्ष जीएसटी के पक्ष में खड़ा हुआ है। उनका कहना है कि जीएसटी से उनकी रकम एक नंबर की बन रही है। वहीं छोटे व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी के आने के बाद वकीलों का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। जहां तीन महीने में उन्हें लेखा जोखा सबमिट करना पड़ता है। जिसके कारण अतिरिक्त व्यस्तता भी बढ़ गई। वही बड़े व्यापारियों को प्रतिमाह लेखा जोखा अकाउंटेंट के माध्यम से देना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी के आने से जहां उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचा है, वहीं धीरे धीरे ही सही पर उनकी पूंजी भी एक नंबर में बढ़ते जा रही है। छोटे व्यापारियों का होने वाला शोषण भी खत्म हुआ है।
सरिया 18% जीएसटी के साथ ₹58 किलो बिक रहा
केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर को लागू किए एक साल पूरा हो गया। विगत एक वर्ष के अनुभव के संबंध में बातचीत करने पर कृषि यंत्र निर्माण करने वाले शिव विलास विश्वकर्मा ने बताया कि जीएसटी के आने के बाद लोहा के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। जीएसटी के पहले जो लोहा ₹35 से ₹40 के बीच बिक रहा था। आज की तारीख में वही सरिया 18% जीएसटी के साथ ₹58 किलो बिक रहा है। जीएसटी के पहले कृषि यंत्र टैक्स फ्री था। जिस पर आज 13% का टैक्स लगाया गया है। जिससे किसानों पर अतिरिक्त मार पड़ रही है। उन्होंने बताया कि जो सरिया 5% की दर साथ ₹35 से ₹36 किलो अधिकतम रेट पर उपभोक्ताओं को मिलता था। आज 18% जीएसटी के साथ ₹58 प्रति किलो के साथ तो उपभोक्ताओं को मिल रहा है। जीएसटी के कारण कृषि यंत्रों के मूल्यों में कई गुना वृद्धि हो गई है। शिव विलास ने बताया कि ₹20 ₹25 घन फुट बिकने वाला मौरंग आज ₹80 से ₹90 प्रति घन फुट बिक रहा है। जो 125 से ₹130 तक बिक चुका है।जीएसटी के कारण महंगाई चरम पर है।
₹4 से ₹20000 का खर्च अतिरिक्त
वहीं दूसरी तरफ जनरल स्टोर का व्यापार करने वाले टिल्लू कुमार ने बताया कि जीएसटी से उनके व्यापार पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा। सारा सामान एक नंबर से आता है और उनकी पूंजी भी एक नंबर में बदल रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी आने के बाद साल में लगभग ₹4 से ₹5 हजार का खर्चा अतिरिक्त बढ़ गया है। जबकि उनका व्यापार समाधान योजना के अंतर्गत आता है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल आवास विकास अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि जीएसटी से आने के बाद लिखा-पढ़ी बढ़ गई और वकील का खर्च भी बढ़ गया। ऐसे व्यापारी जो समाधान योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं। उनके ऊपर प्रतिवर्ष न्यूनतम ₹20000 का खर्च आ गया है तो अधिकतम में काफी बड़ी रकम है। उन्होंने बताया कि जीएसटी के आने से एक फायदा हुआ कि उनकी रकम एक नंबर में आते जा रही है और छोटे व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो गया। ऐसे में कहा जा सकता है कि जीएसटी की मार व लाभ दोनो उपभोक्ताओं को मिल रहा है। व्यापारी व सरकारी कर्मचारी इस के तोड़ में लगे है। जिससे इसका लाभ दोनों पक्षों को मिल सके।