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इटावा सफारी पार्क के आसपास गैरकानूनी गतिविधि, वन मंत्री के सामने उठेगा मुददा

पर्यावरण नियम 2002 के प्राविधानों के अनुसार पार्क के दस किलोमीटर की परिधि में व्यवसायिक निर्माण प्रतिबंधित है...

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Construction near Etawah Safari Park complaint to Dara Singh Chauhan

इटावा सफारी पार्क के आसपास गैरकानूनी गतिविधि, वन मंत्री के सामने उठेगा मुददा

इटावा. चंबल के मिजाज को बदलने के इरादे से बीहड़ों में इटावा सफारी पार्क का निर्माण करवाया गया है। जिसका 1 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकार्पण कर चुके हैं फिर भी अभी इस सफारी पार्क को आम जनमानस के लिए खोला नहीं गया है इसके बावजूद भी पार्क के आसपास इलाकाई लोगों की तरफ से ऐसी गतिविधि शुरू कर दी गई है जो पर्यावरणीय तौर पर पार्क को नुकसान पहुंचाने में जुट गई है। जिसको लेकर के सफारी प्रशासन बेहद चिंतित नजर आ रहा है। इसी कारण सफारी प्रशासन ने जिला प्रशासन से पत्राचार शुरू कर दिया है ताकि इटावा सफारी पार्क को होने वाले नुकसान से बचा जा सके। रविवार को इटावा सफारी पार्क के दौरे पर आ रहे उत्तर प्रदेश सरकार के वन मंत्री दारा सिंह चौहान के समक्ष इस मुददे को प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा, ताकि इटावा सफारी पार्क के आसपास इस तरह की कोई भी गतिविधि ना हो सके जिससे पार्क को किसी भी तरह का नुकसान हो सके।

इटावा सफारी पार्क के निदेशक वी.के.सिंह बताते हैं कि इटावा सफारी पार्क से सटे हुए एक बड़े भूभाग पर निर्माण की कार्रवाई बड़ी तेजी से चल रही है जबकि शासन के निर्देशानुसार इटावा सफारी पार्क के आसपास किसी भी तरीके का कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं इटावा सफारी पार्क के नजदीकी एक क्रेशर प्लांट भी संचालित हो रहा है जिस से निकलने वाली डस्ट इटावा सफारी पार्क के पेड़ों और वन्यजीवों को खासा नुकसान पहुंचाने में जुटी हुई है। क्रेशर प्लांट से निकलने वाली डस्ट पेड़ों की खूबसूरती को बर्बाद कर रही है इसलिए सफारी प्रशासन ने निर्णय लिया है प्लांट को बंद कराया जाए अन्यथा इटावा सफारी पार्क के महत्वपूर्ण समझे जाने वाले पेड़ों को खासी तादाद में बड़ा नुकसान सुनिश्चित है।

इटावा सफारी पार्क और यहां रहने वाले वन्य जीवों को स्वच्छ का हरा भरा माहौल उपलब्ध कराया जाना है। इसके लिए सफारी के आसपास 10 किलोमीटर क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रहेगा। सफारी के आसपास हो रहे हैं कुछ निर्माण कार्यों को लेकर सफारी प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। इसमें बताया गया है कि इससे सफारी तथा वहां के वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे सफारी के चारों ओर 10 किलोमीटर क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रहें। यहां कोई ऐसा प्लांट आदि ना चले जिससे पर्यावरण को खतरा हो और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा।

15 मई को इटावा सफारी पार्क के निदेशक वी. के. सिंह की ओर से जिलाधिकारी इटावा को भेज गये सरकारी पत्र मे स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय चिडियाघर प्राधिकरण के आदेशानुसार 23 नंबवर 2016 को इटावा सफारी पार्क को मिनी जू घोषित किया है जो कि एक संरक्षित क्षेत्र है। पार्क के आसपास व्यवसायिक निर्माण कार्याे से पार्क के वन्य जीवो के संरक्षण एंव विकास पर कुप्रभाव पडेगा। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि पर्यावरण नियम 2002 के प्राविधानों के अनुसार पार्क के दस किलोमीटर की परिधि में व्यवसायिक निर्माण प्रतिबंधित है। कथिपय व्यक्तियों की ओर से निर्माण कार्य किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

इटावा सफारी पार्क ना केवल इटावा के लिए बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए एक रोल मॉडल है इसकी वजह से हमारी पहचान अलग ढंग से बनी है। यह उत्तर भारत के प्रमुख सफारी पार्क को में से एक है। सफारी पार्क में सबसे बड़ी ब्यूटी यह है कि इसमें लायन का ब्रीडिंग सेंटर है और 5 अन्य सफारियॉ भी है। वो एंटीलोप सफारी,डियर सफारी,बियर सफारी,लैपर्ड सफारी ओर लाइन सफारी है।

यहां पर्यटक को पूरे दिन रोके रखने के लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। खास बात यह है कि सफारी पार्क में पर्यटक बन्द गाड़ी में घूमेंगे और वन्य जीव खुले में विचरण करेंगे। सफारी पार्क के निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। यहां चार सफारियां बनाई गई हैं, जिनमें से तीन में शेर, हिरन व भालू लाए जा चुके हैं। विशेषता यह है कि यहां वन्य जीवों के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काफी निर्माण कार्य कराया गया है, जिसमें कृत्रिम नदी, पुल तथा अन्य निर्माण कार्य शामिल हैं।

सफारी का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का मुख्य गेट होगा,जो बनकर तैयार हो गया है। इस गेट से अंदर जाने पर ऐसा लगेगा कि जैसे जंगल में बने किसी पुराने किले में पर्यटक जा रहे हों। मुख्य गेट के पास भी दो टैंक व एक पुराना रेल इंजन भी रखा गया है, जो सफारी के आकर्षण को बढ़ाते हैं।

व्यवस्था यह की गई है कि इटावा सफारी पार्क आने वाले पर्यटक पहले विजिटर फेसिलटीज देखेंगे, उसके बाद उन्हें बन्द गाड़ियों से सफारी दिखाई जाएगी। फिलहाल सबसे पहले हिरन सफारी देखने को मिलेगी। यहां के निर्माण कार्य को इस तरह से अंजाम दिया गया है कि इसकी दीवारें व अन्य कामकाज एक नई वास्तुशैली का अहसास कराते हैं। यहां बनाई गई कृत्रिम नदी में जब पानी भरेगा तो वह वास्तविक नदी जैसी ही लगेगी।

इटावा सफारी पार्क में थिएटर भी बनाया गया है जो कि 4-डी थिएटर है। खास बात यह है कि फिलहाल यूपी में इटावा सफारी पार्क के अतिरिक्त कहीं भी 4-डी थिएटर नहीं है। इसमें वन्य जीवों से संबंधित फिल्म पर्यटकों को दिखाई जाएगी। इसके लिए विशेष चश्मों की व्यवस्था की गई है जो थिएटर में ही पर्यटकों को दिए जाएंगे। इसमें वन्य जीवों के बारे में कई तरह की जानकारी पर्यटकों को मिलेगी।

इटावा सफारी पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सफारी पार्क के अंदर ही खाने-पीने की वस्तुओं का इंतजाम किया जाएगा। सफारी आने वाले पर्यटक अपने मन मुताबिक खाने पीने की चीजें खरीद सकेंगे। यह व्यवस्था विजिटर फेसिलटीज में ही उपलब्ध कराई जा रही है। सफारी में खानपान की व्यवस्था के लिए भी कई कंपनियों से संपर्क किया गया है हालांकि अभी कुछ फाइनल नहीं हुआ है।

इटावा सफारी पार्क में पर्यटकों के लिए जो प्रसाधन गृह बनाए गए हैं वह कोई सामान्य नहीं बल्कि आकर्षित करने वाले हैं। पुरुषों के लिए जो प्रसाधन गृह बनाए गए हैं उनमें शेर का चित्र बना है जबकि महिलाओं के लिए बनाए गए प्रसाधन गृह में शेरनी का चित्र बना है। इन्हें भी आकर्षक रूप दिया गया है।

इटावा सफारी पार्क में आने वाले स्कूली बच्चों को पार्क के अंदर ही वन्य जीवों के बारे में बताया जा सके, इसके लिए पार्क के अंदर एक एसेंबली स्थल भी बनाया गया है। इसमें एक मंच है तथा बच्चों के बैठने के लिए भी एक स्थान है। खास बात यह है कि यहां काफी ऊंचाई पर शेर, शेरनी व शावक बनाए गए हैं। जो बच्चों को लुभाएंगे।