Home Remedies नवंबर महीना दो ऋतुओं के मिलन का महीना है। इन दिनों में दिन छोटा और रातें लंबी हो जाती है। इस दौरान संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। सर्दी, खांसी, बुखार के साथ डेंगू, मलेरिया आदि के मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर रोजमर्रा के खानपान और दिनचर्या में परिवर्तन की सलाह देते हैं।
Home Remedies नवंबर दो ऋतुओं के मिलन का महीना है। इस महीने का मौसम 'कफ' प्रधान होता है। इस दौरान दिन छोटे और रात लंबी होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार इस मौसम में पाचन क्रिया बहुत अच्छी होती है। दो ऋतुओं के मिलन का महीना होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जीवाणु और विषाणु जनित बीमारी जैसे सर्दी, जुखाम, बुखार का प्रकोप बढ़ जाता है। जिससे बचने के लिए घरेलू उपचार कारगर है।
उन्नाव के जिला अस्पताल में तैनात आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार दीक्षित ने बताया कि जीवाणु एवं विषाणु जनित सर्दी-जुकाम-बुखार से छुटकारा पाने के लिए अदरख, तुलसी, कालीमिर्च, दालचीनी, गिलोय का काढा नमक (अगर उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं है तो) डालकर सेवन करें। यदि अत्यधिक बलगमयुक्त खांसी आ रही हो तो मुलेठी चूसना लाभकारी होता है। अत्यधिक जुकाम होने पर तिल के तेल की 4 से 5 बूंद दोनों तरफ नाक में डालने से राहत मिलेगी। अजवाइन और यूकेलिप्टस के पत्तों की भाप नमक एवं कपूर डालकर लेना भी लाभदायक है।
डॉ राजेश कुमार दीक्षित ने बताया कि रात में भोजन के बाद 'गोल्डेन-मिल्क' यानी हल्दी और दूध लेना सेहत के लिए लाभदायक है। छाती में जकड़न होने पर गुनगुने घी में सेंधा नमक मिलाकर छाती में लगाने से लाभ मिलता है। गर्म पेय पदार्थों जिसमें दूध, चाय, काॅफी, सूप, गर्म पानी इत्यादि निश्चित अंतराल में लेते रहना चाहिए। जिससे कि शरीर में पानी की कमी न होने पाए। गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ मल-मूत्र के मार्ग से बाहर निकल जाते हैं। आंवले का प्रयोग किसी भी रुप में लाभकारी होता है। जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्रोटीन (प्यूरीन) कम मात्रा में लें। सहजन, सोंठ, हल्दी इत्यादि लेना लाभकारी होता है।