BJP MLC Devendra Pratap Singh vs Sakshi Maharaj: विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने साक्षी महाराज को आईना दिखाया है। एक पत्र के जरिए उन्होंने कहा कि आप अपने पूर्वजों की तारीफ कीजिए, अच्छी बात है, लेकिन ब्राह्मण समाज को गाली देना या अपशब्द कहना कतई स्वीकार नहीं है।
MLC Devendra Pratap Singh advice to Unnao MP Sakshi Maharaj: उन्नाव सांसद साक्षी महाराज ने ब्राह्मणों को लेकर बड़ा बयान दिया था। जिसे गोरखपुर फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने अभद्र टिप्पणी बताया और बोले किसी भी दशा में स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण सिर्फ एक जाति होता तो उसे युगों का निर्माता नहीं कहा जाता। साक्षी महाराज के बयान को विवादित बयान बताया। ब्राह्मणों के राष्ट्र के लिए त्याग और बलिदान से अपरिचित होने के कारण उन्होंने ऐसी टिप्पणी की है। पत्र में ऋषि दधीचि से लेकर गोस्वामी तुलसीदास, लता मंगेशकर, आर्यभट्ट, सीवी रमन, चंद्रशेखर आजाद मंगल पांडे आदि को याद किया।
उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि महर्षि दाधीच ने विश्व कल्याण के लिए अपनी हड्डियां तक दान कर दीं, परशुराम शक्तियां अपने पास भी रख सकते थे, किंतु उन्होंने प्रभु श्री राम को सौंप दीं क्योंकि सत्ता, धर्म से बड़ी नहीं हो सकती है। चाणक्य, जिन्होंने वनवास में बैठे बालक को 'भारत वर्ष का सम्राट' बना दिया। शंकराचार्य ने वाणी से बिखरे भारत को अखंड धारा बना दिया।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने लिखा कि रामकृष्ण परमहंस के चरणों में बैठकर स्वामी विवेकानंद, गुरु रामदास के दर्शन से छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे शेर खड़े होते हैं। बाजीराव जिन्होंने थाली में रखा भोजन छोड़कर धर्म के सम्मान में रणभूमि को चुना। मंगल पांडे के खून से आजादी की आग होली से पहले भड़की गई। चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल जिनके नसों में रक्षा की क्रांति बहती थी।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" का नारा देने वाले बाल गंगाधर तिलक को याद किया। रानी लक्ष्मीबाई बाई के लिए उन्होंने कहा कि उनमें ब्राह्मणों का वंश नहीं, संस्कार है जहां वीरता जन्म लेती है। स्वामी दयानंद, जिन्होंने खोए हुए भारत को पुकारा और कहा, "वेदों की ओर लौटो।"
कालिदास, तुलसीदास, तानसेन, लता मंगेशकर, आर्यभट्ट, रामानुजम, सी. वी. रमन के विषय में उन्होंने लिखा कि वे सिर्फ नाम नहीं हैं, सभ्यता के स्तंभ हैं, ब्राह्मण जाति नहीं, एक विचार है जहां ज्ञान है, तप है, साधना है, त्याग है वहां ब्राह्मण है। साक्षी महाराज आप अपने पूर्वजों की तारीफ कीजिए, अच्छी बात है, आपके पूर्वज हमारे लिए भी पूजनीय हैं, किंतु पूरे ब्राह्मण समाज को गाली देना और अपशब्द कहना कदापि स्वीकार नहीं है।