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आगरा में सड़क के बीच बनी मजार पर बवाल, ट्रैफिक जाम से जनता परेशान, कोर्ट पहुंचा मामला

आगरा के एमजी रोड पर सड़क के बीच बनी मजार और दरगाह को लेकर विवाद बढ़ गया है। कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया है।

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Apr 11, 2026
MG रोड पर ‘अवैध मजार’ का विवाद गरमाया

Agra News: आगरा शहर के सबसे व्यस्त सड़कों में से एक एमजी रोड पर एक बड़ा विवाद छिड़ गया है। कॉलेज के ठीक सामने सड़क के बीचों-बीच बनी मजार और दरगाह को लेकर हिंदूवादी संगठन ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि ये सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी हैं, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। अब यह मामला अदालत पहुंच गया है, जिससे प्रशासन में हलचल मच गई है।

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विवाद की वजह क्या है?

एमजी रोड आगरा का मुख्य मार्ग है, जहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। लोगों का कहना है कि कॉलेज के सामने सड़क के मध्य में बनी मजार और दरगाह की वजह से ट्रैफिक जाम लगता है। गाड़ियां धीरे चलती हैं और छोटी-मोटी दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष और हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर का आरोप है कि ये मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों में ऐसी अवैध धार्मिक संरचनाओं पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन आगरा में अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

कुंवर अजय तोमर ने दोहरा मापदंड का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि मंदिरों पर तो कार्रवाई होती रही है, लेकिन मजार और दरगाह के मामलों में प्रशासन उदासीन रहता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया, जिसमें सार्वजनिक और सरकारी जमीन पर बने किसी भी धार्मिक ढांचे को हटाने की बात कही गई है।

कोर्ट में याचिका दायर की गई

इससे पहले 19 जनवरी 2026 को कुंवर अजय तोमर ने धारा 80 सीपीसी के तहत प्रशासन को नोटिस भेजा था। इसमें 60 दिन के अंदर मजार और दरगाह हटाने की मांग की गई थी। लेकिन नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई कार्रवाई हुई। इसके बाद उन्होंने अपने वकील शिव आधार सिंह तोमर के जरिए अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दायर कर दी। याचिका में दोनों मजारों को ध्वस्त करने की मांग की गई है। न्यायाधीश श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने आगरा के जिलाधिकारी, नगर निगम के नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को समन भेजा है। सभी पक्षों को 11 मई 2026 को खुद या अपने वकील के जरिए अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

यातायात और सुरक्षा का मुद्दा

वादी का कहना है कि सड़क के बीच मजार होने से वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। खासकर पीक आवर्स में जाम इतना लगता है कि एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवाओं को भी परेशानी होती है। कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोग घायल हुए हैं। कुंवर अजय तोमर ने जनहित में इस मजार को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण गैरकानूनी है। अगर ये हटाया नहीं गया तो वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। साथ ही शहर के अन्य इलाकों में बनी ऐसी संरचनाओं के खिलाफ भी कार्रवाई कराने की बात कही है।

प्रशासन पर सवाल

नेता ने प्रशासन के रवैए पर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि जब मंदिरों की बात आती है तो तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन मजार-दरगाह के मामले में अधिकारी चुप रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे और मजबूत तरीके से लड़ाई लड़ेंगे। यह मामला अब अदालत में है, इसलिए सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि इन मजारों का क्या होगा। इस विवाद ने आगरा में चर्चा तेज कर दी है। एक तरफ यातायात और सुरक्षा की चिंता है, तो दूसरी तरफ धार्मिक भावनाओं का मुद्दा भी जुड़ा है।

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Published on:
11 Apr 2026 09:51 am
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