योगी कैबिनेट विस्तार के बाद भाजपा विधायक आशा मौर्य की सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी हलचल बढ़ गई। पहली पोस्ट में नाराजगी दिखी, जबकि दूसरी पोस्ट में संगठन के प्रति निष्ठा दोहराई।
BJP MLA Social Media Post: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। जहां एक ओर नए मंत्रियों के समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से कुछ नेताओं की नाराजगी भी सामने आने लगी है। इसी कड़ी में भाजपा विधायक Asha Maurya की सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। मंत्रिमंडल विस्तार में नाम शामिल न होने के बाद आशा मौर्य ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और दलबदलू नेताओं को प्राथमिकता मिलने की बात कही।
उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। हालांकि कुछ ही देर बाद उन्होंने अपनी पहली पोस्ट डिलीट कर दूसरी पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण को दोहराया। लेकिन दूसरी पोस्ट में भी उनके मन की पीड़ा साफ दिखाई दी।
भाजपा विधायक आशा मौर्य की पहली पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। उन्होंने लिखा कि देश-प्रदेश से आए फोन कॉल, सोशल मीडिया पर मिले समर्थन और शुभकामनाओं के लिए वह सभी लोगों की आभारी हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा को अब समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं दिखाई दे रही, बल्कि बाहर से आए “बागी और दलबदलू नेताओं” को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अपने समाज का जिक्र करते हुए कहा कि मौर्य समाज के संघर्षशील और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कहीं न कहीं पीड़ादायक है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बिना किसी का नाम लिए साफ संकेत दिया कि मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसे नेताओं को तरजीह दी गई, जो हाल के वर्षों में भाजपा में आए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका इशारा उन नेताओं की तरफ था, जो अन्य दलों से भाजपा में शामिल हुए और उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली।
पहली पोस्ट वायरल होने के बाद भाजपा और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। कुछ ही समय बाद आशा मौर्य ने अपनी पहली पोस्ट डिलीट कर दी और एक नई पोस्ट साझा की। दूसरी पोस्ट में भाषा पहले से काफी संतुलित नजर आई। नई पोस्ट में उन्होंने समर्थकों और शुभचिंतकों का धन्यवाद करते हुए लिखा कि लोगों का प्रेम, आशीर्वाद और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि संगठन और समाज के लिए लगातार काम करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है और वह आगे भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करती रहेंगी। हालांकि इस पोस्ट में भी उन्होंने यह स्वीकार किया कि एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते उनके मन में “थोड़ी पीड़ा” जरूर हुई है।
आशा मौर्य ने अपनी दूसरी पोस्ट में यह भी लिखा कि वह पिछले 35 वर्षों से पार्टी और संगठन के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करती रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा संगठन हित को सर्वोपरि रखा और जनसेवा को अपना लक्ष्य माना। उनका कहना था कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण हर कार्यकर्ता के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है। ऐसे में मन में थोड़ी पीड़ा होना स्वाभाविक है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि यह पीड़ा उनके संकल्प को कमजोर नहीं करेगी, बल्कि समाज और संगठन के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को और मजबूत बनाएगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सरकार 2.0 के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में आठ नेताओं को शामिल किया गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary और समाजवादी पार्टी से अलग हुए Manoj Kumar Pandey को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री बनाया गया, जबकि अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई नेताओं के नाम चर्चा में थे, जिनमें आशा मौर्य का नाम भी शामिल माना जा रहा था। ऐसे में उनका नाम सूची में न आने से समर्थकों में मायूसी देखी गई।
आशा मौर्य की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें संघर्षशील नेता बताते हुए भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद जताई। कई लोगों ने लिखा कि लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे नेताओं को भी सम्मान मिलना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे भाजपा के अंदर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं से जोड़कर देखा।
अपनी दूसरी पोस्ट के अंत में आशा मौर्य ने साफ किया कि वह पहले की तरह आगे भी समाज और संगठन के लिए संघर्ष करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि समाज के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती, सत्यनिष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ जारी रहेगी। उनका यह बयान फिलहाल भाजपा के भीतर अनुशासित नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है, जिसने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।