मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे 82 किलोमीटर लंबा है। 31.77 किमी हिस्सा गाजियाबाद में है। गाजियाबाद में भूमि अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम- 1956 की धारा-3ए की अधिसूचना 8 अगस्त 2011 को जारी हुई थी। इस धारा के तहत भूमि अधिग्रहण का इरादा जताया गया है। धारा-3डी के तहत भूमि को अधिगृहीत किए जाने की अधिसूचना 2012 में जारी की गई। अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का अवार्ड 2013 में घोषित हुआ।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्य सरकार 2.0 की पूरी तरह एक्शन में है। बुधवार को एक बार फिर सीएम योगी ने बड़ी कार्रवाई की है। सीएम योगी ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले में गाजियाबाद की तत्कालीन जिलाधिकारी निधि केसरवानी निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए भारत सरकार को संदर्भित करने के आदेश दिए है। वर्तमान समय में निधि केसरवानी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में तैनात हैं। इसके साथ ही इस मामले में जांच आख्या उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई में देरी करने पर नियुक्ति विभाग के अनुभाग अधिकारी, समीक्षा अधिकारी को भी निलंबित करने के आदेश दिया है। अनुसचिव पर भी कार्रवाई होगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल पर दी गई है। इसके साथ ही दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश दिए हैं।
केंद्र में तैनात हैं निधि केसरवानी
आईएएस अधिकारी निधि केसरवानी वर्तमान में केंद्र सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में तैनात हैं। 2004 बैच की मणिपुर कैडर से आने वाली निधि केसरवानी के खिलाफ भूमि अधिग्रहण मामले में गड़बड़ी का आरोप है।
21 जुलाई 2016 को गाजियाबाद की डीएम बनीं थी
वह 21 जुलाई, 2016 को गाजियाबाद की डीएम बनीं थीं। निधि केसरवानी के खिलाफ कार्रवाई अब केंद्र सरकार को करनी है। प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए भारत सरकार से आग्रह किया है।
किसानों से सस्ते रेट में ली जमीन
गाजियाबाद की तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी पर आरोप है कि इस घोटाले में अधिकारियों ने शुरुआत में किसानों से सस्ते रेट पर जमीन खरीद ली और फिर उसे अपने रिश्तेदारों को खरीदवाकर सरकार को कई गुना ऊंचे रेट पर बिकवा दी गई थी। मेरठ मंडल के पूर्व आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने गाजियाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी विमल कुमार शर्मा और निधि केसरवानी समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया था।
दो अधिकारी हो चुके निलंबित
इस मामले में गाजियाबाद के पूर्व अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) घनश्याम सिंह ने धारा-3डी की अधिसूचना के बाद नाहल गांव में अपने बेटे के नाम जमीन खरीदी और बाद में बढ़ी दर से मुआवजा हासिल किया। इसी तरह अमीन संतोष ने भी अपनी पत्नी व अन्य रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीद कर ज्यादा प्रतिकर प्राप्त किया था। जांच होने पर दोनों निलंबित किए गए थे।