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UP में SIR: इन तीन कारणों से बीजेपी परेशान, सीएम योगी को देना पड़ा बयान, बीजेपी ने बनाया बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (Voter लिस्ट) के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR- Special Intensive Revision) के बाद जो अंतिम मतदाता सूची आएगी क्या वह भाजपा के लिए परेशानी बढ़ाने वाली होगी?

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लखनऊ

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Vijay Kumar Jha

Jan 01, 2026

UP SIR Draft Voter List:

UP SIR Draft Voter List का स्वरूप कैसा होगा? संकेत हैं कि जिन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां मतदाता सूची से अपेक्षाकृत कम नाम कट सकते हैं। (AI Generated Graphic)

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (Voter लिस्ट) के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR- Special Intensive Revision) के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किए जाने की तैयारी पूरी हो गई है। पहले इसे 31 दिसंबर को ही जारी करना था, लेकिन अब 6 जनवरी को को किया जाएगा। अंतिम सूची 6 मार्च को आएगी।

ताजा आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि अंतिम सूची में 12.55 करोड़ नाम हो सकते हैं। यह आंकड़ा भाजपा को परेशान कर रहा है। उसे शक है कि उसके कम से कम ढाई-तीन करोड़ वोटर्स लिस्ट से बाहर रह सकते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए पार्टी ने रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है।

31 दिसंबर तक के आंकड़ों से जो शुरुआती संकेत मिल रहे हैं, उसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा में आ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश में SIR की वजह से भाजपा की परेशानी बढ़ेगी? यह सवाल उठने का कारण बताया जा रहा है कि मतदाता सूची के मसौदे में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम नहीं रहेंगे। यानि कुल मतदाताओं में से 18.7 प्रतिशत बाहर हो जाएंगे! यह बड़ी संख्या है।

नीचे ग्राफिक में आप देख सकते हैं कि ड्राफ्ट सूची में कहां से कितने मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। यह 31 दिसंबर को जारी होने वाले ड्राफ्ट लिस्ट के आधार पर है। अब ड्राफ्ट लिस्ट 6 जनवरी को जारी होगी। उसमें आंकड़े अलग भी हो सकते हैं।

ड्राफ्ट लिस्ट में जिनके नाम नहीं होंगे, उनके पास अपना नाम जुड़वाने का मौका तो रहेगा, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट से इस बात का एक मोटा अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि अंतिम लिस्ट में मतदाताओं की संख्या कितनी रह जाएगी?।

बीजेपी के लिए मजबूत इलाकों से ज्यादा मतदाता होंगे बाहर?

ताजा आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जिन शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत हैं वहां की मतदाता सूची से अपेक्षाकृत ज्यादा मतदाता बाहर हो सकते हैं। लखनऊ से करीब 30 फीसदी मतदाताओं (करीब 12 लाख) के वोटर लिस्ट से बाहर होने का खतरा है। गाजियाबाद, कानपुर नगर, मेरठ, प्रयागराज, गौतम बुद्ध नगर और आगरा से सबसे ज्यादा मतदाता बाहर हो सकते हैं। ये सब भाजपा के मजबूत क्षेत्र माने जाते हैं। देखिए ये चार्ट:

शहरकुल शहरी सीटेंभाजपा के विधायक
लखनऊ97
कानपुर107
वाराणसी87
आगरा99

2024 के लोकसभा चुनाव में भी शहरी क्षेत्रों में बीजेपी/एनडीए का दबदबा रहा।

क्षेत्रबीजेपी (NDA) वोट शेयरसपा-कांग्रेस (INDIA) वोट शेयरसीटों का परिणाम (कुल 80)
शहरी (Urban)41% (बढ़त)30%बीजेपी ने 17 प्रमुख शहरी सीटों में से 12 पर जीत दर्ज की।
ग्रामीण (Rural)35% (गिरावट)44% (भारी बढ़त)इंडिया गठबंधन ने ग्रामीण बहुल इलाकों में बीजेपी को कड़ी शिकस्त दी।

मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षाकृत कम मतदाताओं के सूची से बाहर होने के संकेत हैं। इन जिलों में मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर शामिल हैं। कहां से कितने मतदाता हट सकते हैं, इस चार्ट में देखिए:

जिलाप्रतिशतमतदाताओं की संख्या (लाख में)
रामपुर18.293.21
सहारनपुर16.374.32
मुजफ्फरनगर16.293.44
मुरादाबाद15.763.87
बिजनौर15.534.27

2011 की जनगणना के मुताबिक यहां मुस्लिम आबादी 40 फीसदी से ज्यादा है। इन इलाकों में भी भाजपा ने अपने और अपने साथियों के दम पर अपनी स्थिति ठीक की है। देखिए, यह चार्ट:

जिलालोकसभा क्षेत्र (MP)पार्टीविधानसभा क्षेत्र (MLA)पार्टी
रामपुरमोहिबुल्लाह नदवीसपारामपुर सदर: आकाश सक्सेनाBJP
स्वार: शफीक अहमद अंसारीApna Dal (S)
चमरौआ: नसीर अहमद खानसपा
बिलासपुर: बलदेव सिंह औलखBJP
मिलक (SC): राजबालाBJP
सहारनपुरइमरान मसूदकांग्रेससहारनपुर नगर: राजीव गुंबरBJP
सहारनपुर: आशु मलिकसपा
देवबंद: बृजेश सिंह रावतBJP
गंगोह: कीरत सिंह गुर्जरBJP
नकुड़: मुकेश चौधरीBJP
बेहट: उमर अली खानसपा
रामपुर मनिहारन (SC): देवेंद्र निमBJP
मुजफ्फरनगरहरेंद्र सिंह मलिकसपामुजफ्फरनगर सदर: कपिल देव अग्रवालBJP
बुढ़ाना: राजपाल बालियानRLD
चरथावल: पंकज कुमार मलिकसपा
खतौली: मदन भैयाRLD
पुरकाजी (SC): अनिल कुमारRLD
मुरादाबादरुचि वीरासपामुरादाबाद नगर: रितेश गुप्ताBJP
मुरादाबाद ग्रामीण: नासिर कुरैशीसपा
कुंदरकी: रामवीर सिंह* (उपचुनाव विजेता)BJP
ठाकुरद्वारा: नवाब जानसपा
बिलारी: मोहम्मद फहीम इरफानसपा
कांठ: कमाल अख्तरसपा
बिजनौरचंदन चौहानRLDबिजनौर सदर: शुचि चौधरीBJP
नजीबाबाद: तस्लीम अहमदसपा
नगीना (SC): मनोज कुमार पारससपा
धामपुर: अशोक कुमार राणाBJP
बढ़ापुर: सुशांत सिंहBJP
चांदपुर: स्वामी ओमवेशसपा
नहटौर (SC): ओम कुमारBJP

बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय से RLD (राष्ट्रीय लोक दल) भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन में है। सपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ा था। आने वाले विधानसभा चुनाव में ये साथ रहेंगी या अलग लड़ेंगी, यह अभी तय नहीं है।

ग्रामीण से ज्यादा शहरी वोटर्स होंगे बाहर?

यह भी भाजपा की परेशानी बढ़ाने वाला आंकड़ा हो सकता है। ‘द प्रिंट’ ने अपने विश्लेषण के आधार पर बताया है कि ग्रामीण की तुलना में शहरी क्षेत्रों के मतदाता ज्यादा संख्या में बाहर होंगे।

शहरी क्षेत्रों में भाजपा के वोटर्स ज्यादा हैं, ऐसा माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों में भाजपा का स्ट्राइक रेट 75 प्रतिशत से ज्यादा रहा था, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 60 फीसदी के करीब था।

यही नहीं, 2023 के नगर निकाय चुनावों में भी भाजपा ने सभी 17 नगर निगम में परचम लहराया था। शहरी क्षेत्रों में भाजपा के दबदबे का प्रमाण इन आंकड़ों में देखा जा सकता है

क्षेत्रकुल सीटें (लगभग)बीजेपी की जीत (MLAs)स्ट्राइक रेट / प्रदर्शन
शहरी (Urban)866575% से अधिक
ग्रामीण/अर्ध-ग्रामीण (Rural)31719060%के करीब
कुल (Total)403255कुल बहुमत

असली परेशानी और योगी आदित्य नाथ का हिसाब

वैसे अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को आएगी, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम रहने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपना आकलन लगाया है कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में करीब 16 करोड़ मतदाता तो होने चाहिए। इस हिसाब से करीब साढ़े तीन करोड़ मतदाता छूट रहे हैं। सीएम योगी का यह भी अनुमान है कि जो साढ़े तीन-चार करोड़ मतदाता छूट रहे हैं, उनमें से 85-90 प्रतिशत भाजपा के वोटर्स होंगे। मतलब तीन-साढ़े तीन करोड़ वोटर्स।

भाजपा के लिए केवल संख्या में कमी ही परेशानी का कारण नहीं है, उसके मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में कमजोर क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा नाम बाहर होना भी चिंता का कारण है।

इन परिस्थितियों के मद्देनजर भाजपा का ज़ोर अब नए वोटर्स का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने पर है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है, ताकि नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करवाया जा सके और कोई वैध मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में चुनाव से ऐन पहले SIR नहीं हो रहा है। राज्य में अभी चुनाव में देर है।