Women Reservation Protest:कानपुर में महिला आरक्षण को लेकर भाजपा महिला मोर्चा ने सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल के घर के बाहर प्रदर्शन किया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नेमप्लेट पर जूते-चप्पल मारकर विरोध जताया, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
कानपुर में महिला आरक्षण को लेकर सियासत अब सड़क पर उतर आई है। शनिवार को दामोदर नगर इलाके में उस समय तनाव का माहौल बन गया, जब भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम पटेल के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित महिलाओं ने सांसद के घर के बाहर लगी नेमप्लेट पर जूते-चप्पल बरसाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
दरअसल, संसद में महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर हुई राजनीतिक खींचतान का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। भाजपा महिला मोर्चा का आरोप है कि समाजवादी पार्टी और उसके सांसदों ने इस बिल के खिलाफ रुख अपनाकर महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया है। इसी के विरोध में महिला कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र होकर सांसद के आवास पहुंचीं और नारेबाजी शुरू कर दी।
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प्रदर्शन के दौरान महिलाएं “महिला विरोधी सोच नहीं चलेगी” और “नारी सम्मान का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारे लगाती रहीं। स्थिति उस समय और ज्यादा गरमा गई जब प्रदर्शनकारियों ने सांसद के घर के मुख्य द्वार तक पहुंचकर वहां लगी नेमप्लेट को निशाना बनाया और उस पर चप्पलें बरसाईं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का विरोध करने वाले दल वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े हैं। उनका आरोप है कि ऐसे राजनीतिक दल महिलाओं को बराबरी का हक नहीं देना चाहते और उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना चाहते हैं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस विषय पर स्पष्ट और ठोस समर्थन नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में और अधिक गर्मा सकता है और इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।