वास्तु टिप्स

बीमार बना सकता है घर का वास्तु दोष, फैमिली प्लानिंग में भी आती है परेशानी, ऐसे करें पहचान

Ghar Ka Vastu: वास्तु शास्त्र के अनुसार मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी वास्तु का प्रभाव पड़ता है। इसके कारण कई बार परहेज के बाद भी बीमारी व्यक्ति का पीछा ही नहीं छोड़ती। आइये जानते हैं घर में कैसे पहचानें घर में वास्तु दोष और वास्तु दोष के लक्षण क्या हैं ..
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Oct 13, 2024
Ghar Ka Vastu Dosh
Ghar Ka Vastu Dosh: घर में वास्तु दोष की पहचान

Ghar Ka Vastu Dosh: हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रथम सुख निरोगी काया अर्थात शरीर को स्वस्थ रखने में ही सुख है और व्यक्ति का यही प्रथम लक्ष्य भी होना चाहिए। लेकिन कई बार वास्तु दोष आपका यह सुख छीन लेता है और न दवा काम करती है और न ही परहेज।

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार घर-मकान से जुड़े दोष व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। आइये करते हैं आपके घर में वास्तु दोष की पहचान और जानते हैं वास्तु दोष के लक्षण क्या हैं ..

घर की ये चीजें पैदा करती हैं वास्तु दोष

डॉ. व्यास के अनुसार यदि घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट या फिर सीढ़ियां बनी होती हैं तो घर की मुख्य महिला ही नहीं, बल्कि अन्य सदस्यों को भी मानसिक तनाव या मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।


वास्तु विशेषज्ञ डॉ. अनीष व्यास के अनुसार ईशान कोण देवस्थान होता है। इस कारण यहां बना शौचालय बहुत बड़ा वास्तु दोष उत्पन्न करता है। देवस्थान पर बना टॉयलेट घर की महिलाओं को न सिर्फ बीमार बनाता है बल्कि संतान सुख में भी कमी आती है।


घर का ईशान कोण ऊंचा हो और बाकी सभी दिशाएं उससे नीची हों तो भी घर की महिलाओं को गंभीर बीमारी होने की आशंका बनी रहती है।


उत्तर दिशा की तरफ सिर करके सोने से माइग्रेन, साइनस, सिर दर्द जैसी बीमारियां हो सकती हैं। बेड के सामने शीशा होने से सोते समय छवि दर्पण में नजर आने से व्यक्ति धीरे-धीरे बीमार होने लगता है।

इस दिशा का बंद होना वास्तु दोष

वास्तु विशेषज्ञ डॉ. अनीष व्यास के अनुसार घर की उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा का बंद होना और दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम दिशा का खुला होना भी एक गंभीर वास्तु दोष है। ऐसा होने पर घर के भीतर बीमारी और खर्च दोनों ही अत्यधिक बढ़ जाते हैं।

भोजन बनाते समय इस दिशा में न हो मुंह

किचन के चूल्हे पर खाना बनाते समय घर की महिला का मुंह भूलकर भी दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। ऐसी सूरत में कमर दर्द, सर्वाइकल, जोड़ों का दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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बिस्तर की दिशा भी महत्वपूर्ण

पूर्व दिशा में सिर यानी पश्चिम दिशा में पैर करके सोना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा होता है। दरअसल, सूरज पूर्व दिशा की ओर से निकलता है। सूरज की पहली किरण पूर्व दिशा में ही देखने को मिलती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियां पूर्णतया सत्य हैं या सटीक हैं, इसका www.patrika.com दावा नहीं करता है। इन्हें अपनाने या इसको लेकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

Updated on:
14 Oct 2024 11:48 am
Published on:
13 Oct 2024 08:35 pm