वाराणसी

अखिलेश यादव की रणनीति फेल करने के लिए बीजेपी ने बनाया है प्रत्याशी, मिली जीत तो बन सकते हैं कैबिनेट मंत्री

विरोधी के बाद भी बीजेपी सहयोगी दलों पर दे रही ध्यान, महागठबंधन से लडऩे के लिए बीजेपी को जरूरी है अन्य दलों का साथ
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Updated: 17 Apr 2018, 5:11 PM IST
Amit Shah and Akhilesh Yadav
Amit Shah and Akhilesh Yadav

वाराणसी. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रणनीति फेल करने के लिए बीजेपी ने खास तैयारी की है। विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल को भी प्रत्याशी बनाया है। आशीष पटेल चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया जा सकता है। सहयोगी दलों के विरोध के बाद भी बीजेपी ने गठबंधन दलों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।
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अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति बदल ली है। सपा से अधिक से अधिक पिछड़ा वर्ग के लोगों को जोडऩे के लिए सपा ने खास तैयारी की है। अखिलेश यादव की नजर अब पटेल वोटरों पर है इस वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए सपा ने नरेश उत्तम पटेल को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके बाद फूलपुर में पटेल प्रत्याशी को टिकट देकर अखिलेश यादव ने दूर की राजनीति की है। आम तौर पर यादव व मुस्लिम को अधिका टिकट देने वाली सपा ने अपने पटेल, मौर्या, निषाद, चौहान आदि जातियों पर भी फोकस किया है। पटेल वोटरों के लिए ही बीजेपी ने अपना दल से गठबंधन किया है और अखिलेश यादव के पेटल वोटरों में सेंधमारी रोकने के लिए ही आशीष पटेल को विधान परिषद का प्रत्याशी बनाया गया है।
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IMAGE CREDIT: Patrika

चुनाव में मिली जीत तो मिल सकती है कैबिनेट मंत्री की कुर्सी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही यूपी कैबिनेट में फेरबदल के संकेत दिये हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में अपना दल के कोटे से जय कुमार सिंह जैकी मंत्री है जबकि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर कैबिनेट मंत्री है। बीजेपी ने अपना दल व सुभासपा से गठबंधन बचाये रखने के लिए खास तैयारी की है। ओमप्रकाश राजभर का विभाग बढ़ाया जा सकता है या सुभासपा के अन्य विधायकों को मंत्री बनाया जा सकती है। इसी क्रम में आशीष पटेल के चुनाव जितने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाये जाने की भी चर्चा है।
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कमजोर हो रही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कमजोर हो रही है। उन्नाव कांड ने सीएम योगी सरकार की साख को प्रभावित किया है तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव व मायावती ने लोकसभा चुनाव २०१९ में गठबंधन करने की घोषणा करके बीजेपी की परेशानी बढ़ायी है ऐसे में बीजेपी का सारा ध्यान सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने में है जिसके आधार पर जब यूपी के कैबिनेट में फेरबदल होगा तो पिछड़ों व दलित वर्ग के अधिक लोगों को जगह मिलेगी। ऐसा करके बीजेपी ने अखिलेश यादव के जनाधार को रोकने की योजना बनायी है।
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