
वाराणसी. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रणनीति फेल करने के लिए बीजेपी ने खास तैयारी की है। विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल को भी प्रत्याशी बनाया है। आशीष पटेल चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया जा सकता है। सहयोगी दलों के विरोध के बाद भी बीजेपी ने गठबंधन दलों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।
यह भी पढ़े:-विपक्ष की नयी रणनीति से बीजेपी हुई परेशान, अखिलेश यादव ने बताया था कारण
अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति बदल ली है। सपा से अधिक से अधिक पिछड़ा वर्ग के लोगों को जोडऩे के लिए सपा ने खास तैयारी की है। अखिलेश यादव की नजर अब पटेल वोटरों पर है इस वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए सपा ने नरेश उत्तम पटेल को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके बाद फूलपुर में पटेल प्रत्याशी को टिकट देकर अखिलेश यादव ने दूर की राजनीति की है। आम तौर पर यादव व मुस्लिम को अधिका टिकट देने वाली सपा ने अपने पटेल, मौर्या, निषाद, चौहान आदि जातियों पर भी फोकस किया है। पटेल वोटरों के लिए ही बीजेपी ने अपना दल से गठबंधन किया है और अखिलेश यादव के पेटल वोटरों में सेंधमारी रोकने के लिए ही आशीष पटेल को विधान परिषद का प्रत्याशी बनाया गया है।
यह भी पढ़े:-इस चुनाव में भी सपा व बसपा पर भारी पड़ सकते हैं यह बाहुबली, बीजेपी की राह होगी आसान
चुनाव में मिली जीत तो मिल सकती है कैबिनेट मंत्री की कुर्सी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही यूपी कैबिनेट में फेरबदल के संकेत दिये हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में अपना दल के कोटे से जय कुमार सिंह जैकी मंत्री है जबकि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर कैबिनेट मंत्री है। बीजेपी ने अपना दल व सुभासपा से गठबंधन बचाये रखने के लिए खास तैयारी की है। ओमप्रकाश राजभर का विभाग बढ़ाया जा सकता है या सुभासपा के अन्य विधायकों को मंत्री बनाया जा सकती है। इसी क्रम में आशीष पटेल के चुनाव जितने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाये जाने की भी चर्चा है।
यह भी पढ़े:-अक्षय तृतीया के दिन शनि देव होंगे वक्री, इन राशियों के लोगों को हो सकता नुकसान
कमजोर हो रही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कमजोर हो रही है। उन्नाव कांड ने सीएम योगी सरकार की साख को प्रभावित किया है तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव व मायावती ने लोकसभा चुनाव २०१९ में गठबंधन करने की घोषणा करके बीजेपी की परेशानी बढ़ायी है ऐसे में बीजेपी का सारा ध्यान सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने में है जिसके आधार पर जब यूपी के कैबिनेट में फेरबदल होगा तो पिछड़ों व दलित वर्ग के अधिक लोगों को जगह मिलेगी। ऐसा करके बीजेपी ने अखिलेश यादव के जनाधार को रोकने की योजना बनायी है।
यह भी पढ़े:-बीजेपी, अपना दल व राजा भैया के बीच में फंसी यह सीट , सीएम योगी किसे दिलायेंगे टिकट