
वाराणसी. मुलायम सिंह यादव को जमीनी नेता माना जाता है। सपा के संरक्षक ने बसपा की रणनीति को समझते हुए ही बड़ा बयान दिया था। नेता जी ने कहा था कि बसपा को आधी सीट देने की जरूरत नहीं है इसके बाद ही महागठबंधन ने सीटों का ऐलान किया था। सपा को उसके कोटे की सीट मिल गयी है इसमे से कुछ ऐसी सीटे भी है, जहां पर बसपा से गठबंधन के बाद भी सपा को झटका लग सकता है।
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गठबंधन के सीटों का बंटवारा हो जाने के बाद माना जा रहा है कि बसपा फायदे में रह सकत है, जबकि सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव 2014 में जिन सीटों में सपा द्वितीय स्थान पर थी उसमे से भी कुछ सीटे बसपा को दे दी गयी है। बदले में सपा को वह सीटे दी गयी है जहां पर सपा व बसपा के वोटों को जोड़ दिया जाये तो भी जीतना आसान नहीं होगा। पूर्वांचल की बात की जाये तो सपा को यहां पर अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सपा के पास बीजेपी का गढ़ समझी जाने वाली सीटे भी आयी है, जहां पर बीजेपी को पटखनी देना आसान नहीं होगा।
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पूर्वांचल की इन सीटों पर सपा को लग सकता है झटका
सपा को वाराणसी, चंदौली, गोरखपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर व फूलपुर सीट भी मिली है। वाराणसी में बीजेपी की तरफ से पीएम नरेन्द्र मोदी संभावित प्रत्याशी है यहां पर पूर्व चुनाव में सपा व बसपा को जितने वोट मिले थे उससे दोगुना से अधिक वोट पीएम नरेन्द्र मोदी के खाते में गये थे। इसी तरह सपा ने उपचुनाव में गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट को बीजेपी से छीना है। इसमे से गोरखपुर सीट को सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ मानी जाती है। लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट फिर से कब्जा में करना सपा के लिए आसान नहीं होगा। सपा व बसपा गठबंधन का असर कार्यकर्ताओं को नहीं हुआ तो इन सीटों पर सपा की साइकिल फंस सकती है।
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