
वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बीजेपी अपने सहयोगी दल को बड़ा झटका दे सकती है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी इस दल पर नजर पड़ गयी है यदि बीजेपी इस सहयोगी से किनारा करती है तो बसपा व सपा गठबंधन में यह दल शामिल हो सकता है यदि ऐसा हुआ तो सपा व बसपा गठबंधन को बड़ी ताकत मिल जायेगी।
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बीजेपी के लिए सुभासपा अब परेशानी का सबब बन गयी है। यूपी चुनाव में बीजेपी व सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा का गठबंधन हुआ है। चुनाव खत्म होने के कुछ माह बाद से ही बीजेपी व सुभासपा में पड़ी दरार चौड़ी होती जा रही है। निकाय चुनाव में बीजेपी से अलग होकर सुभासपा ने प्रत्याशी उतारे थे। सुभासपा को जीत तो नहीं मिल पायी थी लेकिन बीजेपी का नुकसान करने में कामयाब हो गयी थी। इसके बाद भी बीजेपी व सुभासपा के संबंध ठीक होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर लगातार मीडिया के जरिए बीजेपी व सीएम योगी सरकार पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। बीजेपी ने खुल कर शराब बंदी की मांग को अस्वीकार कर दिया है जिसे बड़ा मुद्दा बना कर सुभासपा ने 16 से आंदोलन करने की ऐलान किया है। इसके चलते बीजेपी की स्थिति असहज हो गयी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.महेन्द्र नाथ पांडेय ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि बीजेपी अभी तक गठबंधन धर्म निभा रही है लेकिन जिस तरह से ओमप्रकाश राजभर लगातार बयान दे रहे हैं उसे अब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। यदि ओमप्रकाश राजभर में सुधार नहीं होता है तो बीजेपी को कार्रवाई करनी होगी। इस बयान से साफ हो गया है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने के बाद भी सुभासपा ने अपने तेवर नहीं बदले हैं इसलिए बीजेपी अब इस सहयोगी दल से किनारा कर सकती है।
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सुभासपा पर है अखिलेश यादव की नजर
सोशल इंजीनियरिंग मजबूत करने में जुट अखिलेश यादव की नजर सुभासपा पर है। सूत्रों की माने तो ओमप्रकाश राजभर व सपा नेता भी एक-दूसरे के सम्पर्क में है यदि बीजेपी व सुभासपा का गठबंधन खत्म हो जाता है तो ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सपा व बसपा गठबंधन में शािमल हो सकती है यदि ऐसा हुआ तो यूपी के राजभर वोट सीधे सपा व बसपा गठबंधन को मिल जायेंगे। बीजेपी ने ओमप्रकाश राजभर का विकल्प तैयार करने की बहुत कोशिश की है लेकिन सफलता नहीं मिल पायी है। बीजेपी के मंत्री अनिल राजभर के लाख प्रयास के बाद भी वह ओमप्रकाश राजभर का विकल्प नहीं बन पाये।
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लोकसभा सीटों के लिए हो रहा सारा खेल
राजनीतिक जानकारों की माने तो बीजेपी व सुभासपा भले ही एक-दूसरे को लेकर बयानबाजी करते आये हैं लेकिन दोनों ही दल नहीं चाहेंगे कि गठबंधन टूटे। बीजेपी को अति पिछड़ों का वोट लेने के लिए सुभासपा की बहुत जरूरत है और सुभासपा भी जानती है कि पहली बार सत्ता में भागीदारी मिली है यदि लोकसभा चुनाव में गठबंधन खत्म हो जाता है तो सत्ता से भागीदारी चली जायेगी। इसके चलते ही दोनों दल अभी तक अलग नहीं हुए हैं। सारी लड़ाई लोकसभा सीटों को लेकर है। सुभासपा लगातार बयान देकर बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटी है जिससे उसे कम से कम 6 सीट मिल सके। बीजेपी इतनी सीटे किसी भी हाल में देने को तैयार नहीं है ऐसे में दोनों दल में से कोई पीछे नहीं हटता है तो लोकसभा चुनाव 2019 में सुभासपा व बीजेपी का गठबंधन टूट सकता है।
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